कोलकाता. टी बोर्ड दार्जिलिंग के चाय बागानों की हिस्सेदारी चाय बागान श्रमिकों को सौंप सकता है. दार्जिलिंग में राजनीतिक बाधा के कारण चाय बागान 80 दिनों से बंद हैं. दार्जिलिंग टी एसोसिएशन (डीटीए) ने टी बोर्ड और वाणिज्य मंत्रालय से 400 करोड़ रुपये की मदद मांगी है, लेकिन बोर्ड द्वारा अनुदान देने की संभावना कम ही है.
सूत्रों का कहना है कि बोर्ड बिना भुगतान के श्रमिकों को चाय बागान में व्यक्तिगत या सहकारिता सोसाइटी के रूप में हिस्सेदारी सौंप सकता है. टी बोर्ड इस प्रस्ताव पर 18 सितंबर की बैठक में चर्चा करेगा तथा इस माह के अंत में चाय मालिकों के साथ बैठक में वैकल्पिक समाधान पर भी चर्चा करेगा. टी बोर्ड के चेयरमैन पीके बेजबोरुह ने बताया कि उन लोगों को वाणिज्य मंत्रालय से दार्जिलिंग चाय बागानों के लिए पैकेज बनाने की अनुमति मिली है. चाय बागान श्रमिकों की जरूरतों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है.
चूंकि चाय बागान जून के मध्य से बंद हैं. श्रमिकों को कोई भुगतान नहीं मिल रहा है. टी बोर्ड के अधिकारी का कहना है कि केवल अनुदान से ही चाय बागान में फिर से जान नहीं डाला जा सकता है. इसके लिए कुछ मदद की जरूरत होगी. दार्जिलिंग के 87 चाय बागान मालिक या कंपनियों द्वारा संचालित हैं.
