सिलीगुड़ी: बंगाल के गौरव स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन का 125 वर्ष पूरा होने के अवसर में आयोजित कार्यक्रम को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी. इस बात को लेकर सिलीगुड़ी का राजनैतिक माहौल गरमा गया है. प्रशासन द्वारा कार्यक्रम निरस्त किये जाने के बाद भाजपा ने सीधे राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया है.
मिली जानकारी के अनुसार, शिकागो के सर्वधर्म सम्मेलन में भाषण देकर बंगाल के सपूत स्वामी विवेकानंद ने पूरे विश्व में भारत के गौरव को बढ़ाया था. वर्ष 1892 में आयोजित इस शिकागो सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद की ओर से दिये गये भाषण को अब 125 वर्ष पूरे हो गये हैं. इस सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिये गये भाषण के माध्यम से विश्व में भारत का लोहा मनवाने के 125 वर्ष पूरे होने की खुशी में सिलीगुड़ी शहर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.
11 सितंबर को सिलीगुड़ी शहर के बाघाजतीन पार्क में स्वामी विवेकानंद शिकागो सम्मेलन भाषण के 125 वर्ष उद्यापन कमिटी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया था. कमिटी से मिली जानकारी के अनुसार इस आयोजन के लिए पिछले तीन महीने से तैयारियां की जा रही थीं. बाघाजतीन पार्क में कार्यक्रम आयोजन के लिए सिलीगुड़ी नगर निगम से अनुमति ली गयी. शहर में इस आयोजन की अनुमति के लिए सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट से भी नियमानुसार आवेदन किया था. लेकिन कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले रविवार को प्रशासन अनुमति देने से इंकार कर दिया. आयोजक कमिटी का आरोप है कि प्रशासन ने दूसरी बार बात करने तक का समय नहीं दिया.
ममता सरकार ने लगातार तीसरी बार तुगलकी फरमान किया है जारी : प्रवीण सिंहल
वहीं भाजपा ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है. सिलीगुड़ी जिला भाजपा अध्यक्ष प्रवीण सिंहल ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर शिकागो सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के भाषण का 125 वर्ष पूरे होने की खुशी में आयोजित कार्यक्रम को प्रशासन ने निरस्त किया है. किसी वर्ग विशेष को खुश करने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तुष्टीकरण की नीति को अपना लिया है. एक वर्ग को खुश रखने के लिए उन्होंने लगातार तीसरी बार तुगलकी फरमान जारी कर उन्होंने राज्य के नागरिकों पर गहरा आघात किया है. मुस्लिम संप्रदाय को खुश करने के लिए उन्होंने बंगाल का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव दुर्गापूजा के विसर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया. गणेश पूजा के विसर्जन पर भी तुगलकी फरमान जारी कर नागरिकों को निराश किया. वास्तविकता यह है कि सुश्री बनर्जी स्वयं को देश के संविधान के भी ऊपर मानती है. चुनाव हो या फिर उत्सव, कई बार ऐसे फरमान जारी कर उन्होंने इस बात को साबित भी किया है. किसी भी धार्मिक उत्सव को पूरे रीति-रिवाज से मनाने का अधिकार देश के संविधान ने नागरिकों को प्रदान किया है. जबकि मुख्यमंत्री संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक अधिकार पर भी हस्तक्षेप कर रही है. विवेकानंद पर आयोजित कार्यक्रम को भी बिना किसी औचित्य के प्रशासन ने अंतिम क्षण में निरस्त कर दिया. शहर में मुख्यमंत्री की उपस्थिति की वजह से देश को पूरे विश्व में गौरवान्वित करनेवाली इतनी बड़ी हस्ती के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम को निरस्त कराना उनके असम्मान के साथ नागरिक अधिकारों का हनन है. भाजपा इसकी कड़ी भर्त्सना करती है.
12 को होनी है गोरखालैंड मसले पर बैठक
इस संबंध में सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार सिंह व डिप्टी पुलिस कमिश्नर गौरव लाल से संपर्क किया गया. लेकिन राज्य की मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर व्यस्तता की वजह से इस संबंध में बात नहीं हुयी. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 12 सितंबर को अलग राज्य गोरखालैंड आंदोलन के मसले को लेकर उत्तरकन्या में एक बैठक होनी है. इस बैठक की अध्यक्षता राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं करेंगी. पहाड़ पर जारी आंदोलन के दौरान शहर में मुख्यमंत्री की सुरक्षा प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है. इसी वजह से 11 सितंबर के इस कार्यक्रम को अनुमति नहीं दिया गया. इसमें प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं किया गया है.
