सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी में डेंगू से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. दिन-प्रतिदिन बुखार पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है.सिर्फ यही नहीं डेंगू से मृतकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.एक और डेंगू मरीज की मौत के बाद सिलीगुड़ी में मृतकों की संख्या बढ़कर 6 हो गयी है. इधर,अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुखार से पीड़ित मरीजों में से पचास प्रतिशत से अधिक के रक्त जांच में एनएस-1 पॉजेटिव पाये गए हैं.
एक के बाद एक मौत भी हो रही है. दूसरी ओर मैक एलाइजा टेस्ट रिपोर्ट के बहाने जिला स्वास्थ विभाग पल्ला झाड़ रहा है. आलम यह है कि बुखार से पीड़ित रोगियों को सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में रखने की जगह नहीं है. भारी बारिश की वजह से डेंगू के और तेजी से फैलने की आशंका है.
बुधवार को डेंगू से एक और मौत हो गयी है. इस बार एक होमियोपैथ के डॉक्टर डेंगू की चपेट में आ गये. मृत डॉक्टर का नाम सौम्यसुदर्शन दत्ता (55) बताया गया है. वे प्रधान नगर इलाके के निवासी थे और उसी इलाके में उनका चेंबर भी था. पिछले काफी दिनों से वे बुखार से पीड़ित थे. उन्हें प्रधान नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. दो दिन बाद उनकी पत्नी को भी तेज बुखार हुआ और उन्हें भी उसी अस्पताल में डेंगू की संभावना बताकर भर्ती कराया गया. दोनों के रक्त जांच में एनएस-1 पोजेटिव पाये गये हैं. बुधवार को डॉक्टर की मौत हो गयी जबकि उनकी पत्नी अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं. इस संबंध में दार्जिलिंग जिला मुख्य स्वास्थ अधिकारी असित विश्वास ने बताया कि मैक एलाइजा टेस्ट रिपोर्ट आने के पहले इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा जा सकता.
डेंगू के लिए अलग से कोई इलाज नहीं
विशेषज्ञों और डॉक्टरों का मानना है कि ब्लीचिंग व मच्छर मारने की दवा के छिड़काव से डेंगू पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है. ब्लीचिंग पाउडर का असर दो घंटे से अधिक नहीं होता है. ब्लीचिंग में मौजूद क्लोरीन हवा में मिलकर उड़ जाता है. इसके बाद सिर्फ चूना बच जाता है. मच्छर मारने की दवा का बस्ती इलाके में हाइड्रेन तथा कचरे का अधिक जमाव होने वाले इलाकों में किया जाता है. लेकिन डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं. इधर, अस्पातलों में डेंगू से लड़ने की सभी व्यवस्था होने का दावा किया जा रहा है. मंत्री गौतम देव का कहना है कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल व उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में डेंगू के इलाज की सभी व्यवस्था है. जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के लिए अलग से कोई इलाज नहीं है.
प्लेटलेट्स कम हो जाने की वजह से शरीर काफी कमजोर हो जाता है और लगातार प्लेटलेट्स की गिरावट की वजह से मौत होती है. इलाज में शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया जाता है. करीब 12 घंटे के अंतराल पर मरीज के खून की जांच करायी जानी चाहिए. जबकि अधिकांश अस्पतालों में मैक एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट आने तक मरीज को पैरासिटामॉल टेबलेट व ग्लूकोज पर रखा जाता है.
डेंगू पीड़ितों की संख्या 250 के पार पहुंची : जिला स्वास्थ विभाग के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम में डेंगू पीड़ितों की संख्या 250 के पार पहुंच चुकी है. वहीं सिलीगुड़ी महकमा परिषद इलाके में डेंगू पीड़ितों की संख्या पचास के करीब है. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल व उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में सौ से अधिक मरीज बुखार से पीड़ित हैं. अब मरीजों को भर्ती लेने के लिए सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में जगह नहीं है. आलम यह है कि जिला अस्पताल में मरीजों को वार्ड के बाहर नीचे फर्श पर रखा जा रहा है. एक बेड पर एक से अधिक मरीजों को रखा जा रहा है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मेल मेडिसीन वार्ड में बेड भरे हुए हैं. बुखार आदि के लिए आइसोलेटेड वार्ड भी मरीजो से अस्त-व्यस्त है. प्रतिदिन ही मरीज भर्ती हो रहे हैं. स्वाभाविक रूप से बेड की समस्या होगी. कुछ रोगियों को उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज जाने की भी सलाह दी जा रही है. सिलीगुड़ी व आस-पास के निजी नर्सिंगहोम व निजी अस्पतालों में भी बुखार के मरीजों की संख्या काफी है.
लगातार बिगड़ रहे हालात
डेंगू की रोकथाम के लिए सिलीगुड़ी नगर निगम द्वारा लगातार अभियान जारी है. निगम के सभी वार्ड पार्षद अपने इलाके में साफ-सफाई, ड्रेनों में मच्छर मारने की दवा का छिड़काव, ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव आदि करा रहे हैं. निगम के मेयर स्वयं इलाकों में घूम-घूमकर लोगों को डेंगू के मच्छर से बचने का तरीका बता रहे हैं. निगम के स्वास्थ कर्मचारी, आईसीएस कर्मचारी घर-घर जाकर जल जमाव की स्थिति का जायजा ले रही हैं. परचे बांट कर सभी को डेंगू के बारे में जागरूक किया जा रहा है. राज्य के पर्यटनमंत्री गौतम देव भी ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव करा रहे हैं. उसके बाद भी डेंगू से शहर की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. एक के बाद एक मौत से लोगों में इसका आतंक भी काफी बढ़ा है.
