कोलकाता: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के तीन अक्तूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए महाजाति सदन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया. इसे लेकर आरएसएस व राज्य सरकार फिर आमने-सामने है. आरएसएस ने महाजाति सदन के फैसले के खिलाफ अदालत में अपील करने का निर्णय किया है.
आरएसएस के प्रांत कार्यवह डॉ जिष्णु बसु ने प्रभात खबर को बताया कि सिस्टर नवेदिता की 150वीं जन्म वार्षिकी के अवसर पर सिस्टर नवेदिता मिशन ट्रस्ट के तत्वावधान में तीन अक्तूबर को महाजाति सदन में एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया जाना था. इस कार्यक्रम में सिस्टर नवेदिता के भारतीय समाज में योगदान व अन्य विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है. कार्यक्रम के आयोजन के लिए सिस्टर नवेदिता मिशन ट्रस्ट ने महाजाति सदन के कक्ष की बुकिंग के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्ररांभिक टाल-मटोल के बाद अंतत: कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं दी गयी.
डॉ बसु ने बताया कि कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति मांगे जाने पर महाजाति सदन के सचिव नुरूल हक ने आरंभ में कहा है कि इस बाबत पहले कोलकाता पुलिसके अतिरिक्त पुलिस आयुक्त से अनुमति ले लें. लेकिन जब उनलोगों ने कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त को इस बाबत फोन किया था और उन्होंने सोमवार को इस बाबत बात करने की बात कही थी. लेकिन इस बीच नुरूल हक का फिर फोन आया कि वे लोग कार्यक्रम आयोजन की अनुमति देने में असमर्थ हैं.
उन्होंने कहा कि नुरूल हक ने सूचित किया है कि चूंकि महाजाति सदन की मरम्मत का कार्य चल रहा है. इस कारण वे लोग कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति देने में असमर्थ हैं. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नहीं है.
कार्यक्रम का आयोजन सिस्टर निवेदिता मिशन ट्रस्ट की ओर से किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं देना पूरी तरह से गलत है. उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक देश है और देश के प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से सभा करने व संगोष्ठी करने का अधिकार है. लेकिन पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है. वे लोग इस फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में अपील करेंगे.
मकर संक्रांति पर भी भागवत की ब्रिगेड सभा की अनुमति नहीं मिली थी
डॉ बसु ने कहा कि इसके पहले भी मकर संक्रांति के अवसर पर आरएसएस प्रमुख की ब्रिगेड में सभा की अनुमति कोलकाता पुलिस ने नहीं दी थी. इसके खिलाफ उन लोगों ने उच्च न्यायालय में अपील की. उच्च न्यायालय ने कोलकाता पुलिस को सभा की अनुमति नहीं देने पर न केवल फटकार लगायी थी, बल्कि पुलिस के आचरण की निंदा भी की थी और अंतत: ब्रिगेड मैदान में संघ प्रमुख की सभा हुई थी. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में पूजा आयोजन से लेकर कई बार ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं, जब राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा संघ के कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गयी है और अंतत: उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से सभा हुई थी.
उल्लेखनीय है कि तृणमूल सरकार ने राज्य में आरएसएस के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित है और हाल में विधानसभा में इस बाबत एक सर्वदलीय प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है.
फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटायेगा आरएसएस
- आरएसएस के प्रांत कार्यवाह डॉ जिष्णु बसु ने दी जानकारी
- सिस्टर नवेदिता की 150वीं जन्म वार्षिकी पर सिस्टर नवेदिता मिशन ट्रस्ट के तत्वावधान में तीन अक्तूबर को महाजाति सदन में आयोजित होनेवाली थी व्याख्यानमाला
- महाजाति सदन के सचिव नुरूल हक ने अनुमति देने से किया इनकार
