सिलीगुड़ी : पेयजल समस्या व डेंगू को लेकर फिर से निगम की बोर्ड बैठक जम कर हंगामा हुआ. सभागार में विरोधी दल तृणमूल के हंगामे से मेयर अशोक भट्टाचार्य भी आपा खो बैठे. करीब आधे घंटे तक निगम के सभागार में नारेबाजी और तृणमूल-माकपा बोर्ड के साथ जोरों का तर्क-वितर्क हुआ. राज्य की तृणमूल सरकार पर सीधा हमला करते हुए मेयर ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी होने की वजह से तृणमूल में अकड़ है. पुलिस व पावर होने की वजह से निगम की प्रत्येक बैठक में तृणमूल माकपा बोर्ड को आंख दिखाती है. सिलीगुड़ी की जनता ने हमे निगम के लिए चुना है. राज्य सरकार की असहयोगिता के साथ तृणमूल वार्ड पार्षदों की धमकी बर्दास्त नहीं किया जायेगा.
दुर्गोत्सव के पहले गुरूवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के सभागार में मासिक बोर्ड बैठक आयोजित हुई. बैठक शुरू होते ही सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर आठ की भाजपा पार्षद ने पेयजल समस्या का तार छेड़ा. इसके बाद मोशन पर्व में विरोधी दल नेता तृणमूल के रंजन सरकार ने माकपा बोर्ड को पेयजल की समस्या पर घेरना शुरू किया. अपने वक्तब्य में श्री सरकार ने कहा कि पिछले कई दिनों से शहर में पेयजल की समस्या गहरा रही है. पेयजल की बोतलों की बिक्री काफी बढ़ गयी है. आलम यह है कि गैराज आदि में भी पानी की बोतल बिक रही है. शहर के नागरिक पेयजल को तरस रहे हैं, और निगम की माकपा बोर्ड हाथ-पर हाथ धरे बैठी है. निगम के 35 हजार घरों में पेयजल कनेक्शन है. इसके अतिरिक्त 18 सौ स्टैंड पोस्ट हैं. शहर की 80 प्रतिशत नागरिक निगम की पेयजल व्यवस्था पर निर्भर है. मेयर नागरिकों की समस्या छोड़कर महीने में 20 दिन कोलकाता व देश भ्रमण में ही गुजारते हैं. किसी भी समस्या पर निर्णय लिए जाने के बाद विरोधियों के साथ बैठक बुलाया जाता है. श्री सरकार ने आगे से किसी भी बैठक में शामिल न होने का दावा किया है.
इसके बाद तृणमूल पार्षद कृष्ण चंद्र पाल ने भी मेयर को पेयजल समस्या पर घेरा. फिर नांटू पाल ने डेंगू से हुए चार लोगों की मौत को लेकर बोर्ड पर कई सवाल खड़े किए. पेयजल समस्या पर जवाब देने के लिए मेयर परिषद सदस्य जय चक्रवर्ती खड़े हुए तो तृणमूल ने हंगामा शुरू कर दिया. तृणमूल मेयर के जवाब की मांग कर रहे थे. इसी बात पर विवाद खड़ा हो गया. निखिल सहनी ने चेयरमैन को एै कहकर संबोधित कर दिया. फिर माकपा और तृणमूल पार्षदों के बीच तर्क-वितर्क शुरू हो गया. करीब आधे घंटे तक तृणमूल पार्षदों ने सभागार में मेयर अशोक भट्टाचार्य के पदत्याग की मांग पर नारेबाजी की.
बैठक समाप्त होने के बाद मेयर ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी होने की वजह से तृणमूल पार्षदों की धमकियों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. इससे पहले भी तृणमूल पार्षदों ने चेंबर में हमला किया. प्रत्येक बैठक में तृणमूल पार्षद आंख दिखाकर धमकी देते हैं. एक तरफ राज्य सरकार की आर्थिक असहयोगिता के बाद भी माकपा बोर्ड कार्य कर रहा है. सिलीगुड़ी की जनता ने मुझे मेयर और विधायक के रूप में चुना है. तृणमूल के दया का दान नहीं बल्कि एक जनप्रतिनिदि होने के नाते सिलीगुड़ी वासियों का हक मांग रहा है. सिलीगुड़ी नागरिकों के हित में जीवन के अंत तक तृणमूल से लड़ाई जारी रहेगा.
पार्षदों की सुरक्षा का भी उठा मामला
हाल ही में सिलीगुड़ी के एक नंबर वार्ड की भाजपा पार्षद मालती राय पर स्थानीय तृणमूल कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया था. यहां तक कि पुलिस के सामने एक महिला पार्षद के साथ हाथापाई की गयी. 1 नंबर बोरो कमिटी के चेयरमैन स्निगधा हाजरा ने इस मामले को सभागार में उठाया. तृणमूल की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी एक राजनीतिक दल के द्वारा एक महिला पार्षद पर हमला करना निंदनीय है. भाजपा पार्षद खुशबू मित्तल ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि महिला पार्षदों की सुरक्षा के लिए निगम को कदम उठाना होगा. इस संबंध में निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस पर ठीकरा फोड़ दिया.
कविता पाठ कर चेयरमैन ने सुलझाया विवाद
निगम के 23 नंबर वार्ड में वाटर टैंक का काम तीन महीने रूकवाने व कचरा सफाई विभाग में गाड़ी व तेल धांधली के मामले ने विवाद को इतना गहरा दिया कि मेयर ने भी अपना आपा खो दिया. मेयर ने कहा कि पेयजल समस्या को के समाधान के लिए जो तृणमूल पार्षद आज बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं उन्होंने ने ही 23 नंबर वार्ड में टैंक का काम तीन महीने तक रोक रखा था. बाद में विरोधी दल नेता रंजन सरकार से आग्रह कर 23 नंबर वार्ड में काम शुरू कराया गया है. तृणमूल के पार्षदों की करतूत मालूम है. मेयर ने कचरा सफाई विभाग के गाड़ियों और तेल की धांधली में भी तृणमूल की ओर इशारा किया है. इसी बात पर तृणमूल के पार्षदों ने जम कर हंगामा किया. इस विवाद के बाद 23 नंबर वार्ड के तृणमूल पार्षद कृष्ण चंद्रपाल सभागार से चले गये. अंत में निगम के चेयरमैन दिलीप सिंह ने हिंदी के विख्यात कवि दुष्यंत की एक कविता की चंद लाइनें पेश की. ‘हो गयी है पीर पर्वत सी अब पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए.’ चेयरमैन के इस कविता पाठ के बाद सभागार का माहौल शांत हुआ और विचार-विमर्श शुरू हुआ.
