दार्जिलिंग. दार्जिलिंग पहाड़ की समस्या को लेकर कोलकाता में आयोजित सर्वदलीय बैठक में जो हुआ, उससे गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग भड़क उठे हैं. उन्होंने खासकर तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रुख पर नाराजगी जतायी है. इसके अलावा वह बैठक में शामिल अपने साथियों से भी क्षुब्ध हैं कि उनलोगों ने बैठक का बहिष्कार क्यों नहीं किया. बैठक के बाद पत्रकारों को उन्होंने जो संदेश भिजवाया है उसके अनुसार, कोई बातचीत सिर्फ गोरखालैंड पर की जायेगी.
श्री गुरुंग ने कहा कि उन्हें बैठक के बारे में जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गोरखालैंड पर नहीं, बल्कि पहाड़ के विकास पर बात करना चाह रही थीं. पहाड़ के लोग अभी विकास के लिए नहीं, बल्कि अपनी जातीय पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं. यह जातीय पहचान अलग गोरखालैंड राज्य से ही मिलेगी. उन्होंने कहा कि अगर बातचीत गोरखालैंड पर नहीं थी तो पहाड़ से गये प्रतिनिधियों को बैठक का बहिष्कार करना चाहिए था. उन्होंने कहा कि उन नेताओं के लौटकर आने पर उनसे इस बारे में जवाब मांगा जायेगा.
श्री गुरुंग ने कहा कि द्विपक्षीय बातचीत से इस समस्या का समाधान नहीं होने वाला है. दरअसल, राज्य सरकार गोरखालैंड समस्या का समाधान ही नहीं चाहती. यदि राज्य सरकार समाधान चाहती तो मुख्यमंत्री सर्वदलीय बैठक में आंदोलन के दौरान पहाड़ पर हुए नुकसान के लिए गोजुममो से मुआवजे की मांग नहीं करती. इससे जाहिर है कि मुख्यमंत्री की दिलचस्पी गोरखालैंड समस्या के समाधान के प्रति नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि वह गोरखालैंड के लिए लड़ रहे हैं. इससे किसको क्या नुकसान होता है, इससे उनको कोई मतलब नहीं. मोर्चा प्रमुख ने कहा, अगर गोरखालैंड आंदोलन में मेरी मौत हो जाती है तो मेरे परिवार के लोग भी राज्य सरकार से मुआवजे की मांग नहीं करेंगे. राज्य सरकार को भी गोजमुमो से मुआवजा नहीं मांगना चाहिए.
उन्होंने कहा कि अस्सी के दशक में भी गोरखालैंड आंदोलन हुआ था, तब भी विकास कोई मुद्दा नहीं था. उस समय भी जातीय पहचान की लड़ाई थी. आज भी जातीय पहचान की लड़ाई है. इसके साथ ही श्री गुरुंग ने पहाड़ पर बेमियादी बंद जारी रखने की घोषणा करते हुए कहा कि अगर किसी के बहकावे में अगर दुकानदारों ने दुकान खोली तो उसके जिम्मेदार वो लोग खुद होंगे. उनका कहना है कि कोलकाता गये प्रतिनिधि बुधवार को दार्जिलिंग लौट आयेंगे. उसके अगले दिन गुरुवार को दार्जिलिंग में गोजमुमो केंद्रीय कमेटी की बैठक होगी. उसमें बेमियादी बंद पर बात होगी. उन्होंने इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर तत्काल त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने की मांग की.
द्विपक्षीय वार्ता मंजूर नहीं : क्रामाकपा सर्वदलीय बैठक के परिणामों से क्रामाकपा भी खुश नहीं है. पार्टी के केंद्रीय कमेटी के सदस्य शरण छेत्री का कहना है कि द्विपक्षीय वार्ता मंजूर नहीं है. राज्य सरकार गोरखालैंड समस्या का हल नहीं करना चाहती. क्रामाकपा कोई भी बातचीत सिर्फ गोरखालैंड पर करना चाहती है.
