लेकिन वगैर जांच पड़ताल किये गोजमुमो प्रमुख बिमल गुरूंग सहित अन्य पार्टी नेताओं के विरूद्ध मामला दर्ज किया गया है, जो ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि आज गोर्खालैंड अनिश्चितकालीन बंद 67 दिन पार कर चुका है. लेकिन अभी तक राजनैतिक स्तर पर इसके समाधान की दिशा में सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है. इससे साफ जाहिर है कि राज्य तथा केन्द्र सरकार गोरखालैंड आंदोलन को लेकर गंभीर नहीं है. अगर समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन और लंबा खींच सकता है.
गोरखालैंड से ही भाषा व संस्कृति रहेगी सुरक्षित : विमल गुरूंग
दार्जिलिंग. पहाड़ में गोरखालैंड राज्य के लिए चल रहे बेमियादी बंद के एक जटिल मोड़ पर गोरखा समुदाय 27वां नेपाली भाषा मान्यता दिवस मना रहा है. इस महत्वपूर्ण दिन पर गोरखा समुदाय को शुभकामना देते हुए गोजमुमो प्रमुख और पूर्व जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग ने अलग गोरखालैंड राज्य को अनिवार्य बताते हुए कहा कि गोरखालैंड […]

दार्जिलिंग. पहाड़ में गोरखालैंड राज्य के लिए चल रहे बेमियादी बंद के एक जटिल मोड़ पर गोरखा समुदाय 27वां नेपाली भाषा मान्यता दिवस मना रहा है. इस महत्वपूर्ण दिन पर गोरखा समुदाय को शुभकामना देते हुए गोजमुमो प्रमुख और पूर्व जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग ने अलग गोरखालैंड राज्य को अनिवार्य बताते हुए कहा कि गोरखालैंड राज्य के बिना हमारी भाषा व संस्कृति सुरक्षित नहीं है. न ही गोरखा समुदाय का अस्तित्व ही सुरक्षित रहने वाला है.
गोजमुमो प्रमुख ने कहा, नेपाली अब एक भारतीय भाषा बन चुकी है. इस नाते हम सभी गोरखा भी भारत के नागरिक हैं. यह संविधान में सुनिश्चित हो चुका है. केंद्र सरकार ने आठवीं अनुसूची के तहत नेपाली को एक राष्ट्रीय भाषा के बतौर मान्यता दे दी है. इसीलिये अब हमें गोरखालैंड राज्य दिलाकर हमें हमारा अधिकार मिलना चाहिये. हमने गोजमुमो के स्थापना काल से ही पहाड़ के सभी सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में काम काज नेपाली में किये जाने की मांग करते रहे हैं. जीटीए का प्रशासन चलाने के दौरान हमने जीटीए के आधिकारिक काम काज में नेपाली का उपयोग शुरु भी कर दिया था.
पहाड़ पर नेपाली भाषा की उपेक्षा पर जतायी नाराजगी
विमल गुरुंग ने परोक्ष रुप से राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उनके प्रयास के बावजूद पहाड़ में नेपाली भाषा के साथ भेदभाव किया जा रहा था. पहाड़ में नेपाली को आधिकारिक भाषा का दर्जा कानूनी तौर पर रहने के बावजूद सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों से लेकर विज्ञापन और आवेदनपत्रों के काम में ‘ अन्य ‘ भाषा का उपयोग कराये जाने से हमारी अस्मिता आहत हुई है. इससे गोरखा बहुल दार्जिलिंग के पार्वत्य क्षेत्र में नेपाली भाषा का अस्तित्व आज संकट में है. उन्होंने कहा कि आज नेपाली मान्यता दिवस के पुनीत अवसर पर मैं कहना चाहूंगा कि हम अन्य भारतीय भाषाओं को सीखें लेकिन हृदय में नेपाली को रखना नहीं भूलें. उन्होंने नेपाली भाषा के संरक्षण और संवर्द्धन के लिये प्रयास करने का आह्वान सभी पहाड़वासियों से किया.
गोरखालैंड आंदोलन से कानून-व्यवस्था को समस्या नहीं : केवी वातर
माकपा की दार्जिलिंग जिला सचिव मंडली के सदस्य केवी वातर ने सोमवार को कहा कि चल रहे गोरखालैंड आंदोलन से कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि राजनैतिक समस्या है. उन्होंने कहा कि गोरखालैंड के लिए चल रहे आंदोलन को समाप्त करने के लिए राजनैतिक स्तर पर बातचीत होना जरूरी है, लेकिन राज्य सरकार समस्या के समाधान करने की बजाय आंदोलनकारियों को उकसाने का काम कर रही है. श्री वातर ने कहा कि दो दिन पहले पहाड़ में दो बम विस्फोट हुआ है, इसकी हम तीव्र निंदा करते हैं.