आदिवासी व गोरखा आपस में लड़नेवाले नहीं : जॉन बारला

जलपाईगुड़ी: विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में डुवार्स क्षेत्र में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. लेकिन बुधवार को बानरहाट में पुलिस ने जॉन बारला के नेतृत्व में निकाली जानेवाली रैली को रोक दिया. इसके चलते जॉन बारला के समर्थक आदिवासी खेमे में नाराजगी है. जॉन बारला ने अपनी तीखी प्रक्रिया में रैली रोके जाने […]

जलपाईगुड़ी: विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में डुवार्स क्षेत्र में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. लेकिन बुधवार को बानरहाट में पुलिस ने जॉन बारला के नेतृत्व में निकाली जानेवाली रैली को रोक दिया. इसके चलते जॉन बारला के समर्थक आदिवासी खेमे में नाराजगी है. जॉन बारला ने अपनी तीखी प्रक्रिया में रैली रोके जाने की घटना को अलोकतांत्रिक करार दिया है. उन्होंने कहा कि कहने को हमारा देश आजाद है, लेकिन जिस देश में जनता को रैली व सभाएं करने की अनुमति नहीं दी जाती, उस देश में आजादी का कोई मतलब नहीं रह जाता.
राज्य सरकार पर डुवार्स को अशांत करने का आरोप लगाते हुए जॉन बारला ने कहा कि राज्य सरकार जितनी भी कोशिश करे, डुवार्स में 2010 की तरह गोरखा व आदिवासियों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा नहीं की जा सकती. हमारी नीति स्पष्ट है, हमलोग न तो गोरखालैंड आंदोलन का समर्थन करेंगे और न ही उसका विरोध.

हमलोग सभी समुदायों के साथ आपसी भाईचारा और मैत्री का माहौल कायम रखना चाहते हैं.उल्लेखनीय है कि आदिवासी विकास परिषद के नेतृत्व को लेकर लंबे समय तक आदिवासी नेता जॉन बारला और बिरसा तिर्की के समर्थकों के बीच तनातनी चलती रही है. दोनों ही आदिवासी विकास परिषद का नेतृत्व करने करने का और वास्तविक आदिवासी विकास परिषद होने का दावा करते हैं. एक तरफ जहां आदिवासी विकास परिषद के राज्य अध्यक्ष बिरसा तिर्की ने गोरखालैंड आंदोलन के नेतृत्व को डुवार्स से अलग रहने की चेतावनी दे डाली है, वहीं जॉन बारला का रुख गोरखालैंड के प्रति सख्त नहीं है.

पहाड़ में चल रहे आंदोलन के बाद गोजमुमो नेतृत्व डुवार्स और तराई में गोरखालैंड आंदोलन का विस्तार करना चाहता है. इस प्रयास में उसे जॉन बारला गुट का सहयोग मिल सकता है. हालांकि उन्होंने खुलकर समर्थन देने की बात नहीं कही है. कुल मिलाकर डुवार्स के आदिवासी इस क्षेत्र को छठी सूची के अंतर्गत स्वायत्त शासन के तहत लाना चाहते हैं. आदिवासी विकास परिषद के राज्य उपाध्यक्ष और चाय श्रमिक नेता तेजकुमार टोप्पो ने कहा है कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हमलोगों ने फिर से डुवार्स क्षेत्र को छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त शासन दिये जाने की मांग की है. यह हमारे संगठन की पुरानी मांग है. उत्तर बंग आदिवासी विकास परिषद के सचिव चंदन लोहार का कहना है कि छठी अनुसूची के अलावा डुवार्स का विकास संभव नहीं है. दशकों से शोषण व उपेक्षा का शिकार आदिवासियों की उन्नति इसी व्यवस्था के तहत मुमकिन है.

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