आंदोलन की मार: बिजली परियोजनाओं की टूटी कमर, हर दिन 12 लाख रुपये का हो रहा है नुकसान

सिलीगुड़ी. गोरखालैंड आंदोलन ने जहां एक ओर दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र सहित सिलीगुड़ी की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न सरकारी विभागों को भी इसका खमियाजा भुगतना पड़ रहा है. इसी कड़ी में ताजा मामला बिजली विभाग का है. बिजली विभाग को गोरखालैंड आंदोलन शुरू होने के बाद से लेकर अब तक […]

सिलीगुड़ी. गोरखालैंड आंदोलन ने जहां एक ओर दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र सहित सिलीगुड़ी की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न सरकारी विभागों को भी इसका खमियाजा भुगतना पड़ रहा है. इसी कड़ी में ताजा मामला बिजली विभाग का है. बिजली विभाग को गोरखालैंड आंदोलन शुरू होने के बाद से लेकर अब तक करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है. बिजली उत्पादन में गिरावट से हर दिन 12 लाख रुपये की क्षति हो रही है.

बिजली वितरण कंपनी के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में स्थित नौ बिजली परियोजनाओं में से अधिकांश परियोजनाओं पर काम बंद है. कई परियोजनाओं में गोजमुमो समर्थकों ने आग लगा दी है. एक टीसीएफएचपी परियोजना के चालू रहने से बिजली विभाग को थोड़ी राहत मिल रही है. इसके अलावा एक-दो अन्य परियोजनाओं में भी कुछ मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. आधिकारिक सूत्रों ने आगे बताया कि पहाड़ पर नौ बिजली परियोजनाओं से करीब 177 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है, जो घटकर 100 मेगावाट से भी कम हो गया है. गनीमत है कि टीसीएफएचपी परियोजना से लगभग 68 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है.

इस संबंध में डब्ल्यूबीएसइबी इंप्लाइज एंड वर्कर यूनियन के महासचिव बलाई दास का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी राज्य सरकार को दी गयी है. ऐसा नहीं है कि बिजली कर्मचारी परियोजना स्थलों पर काम नहीं करना चाहते. यदि उनकी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की जाए तो बिजली कर्मचारी वहां काम पर जा सकते हैं. उन्होंने राज्य सरकार से पहाड़ के तमाम बिजली परियोजनाओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ ही कर्मचारियों को भी पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि गोरखालैंड आंदोलन की वजह से अब तक ढाई लाख यूनिट बिजली उत्पादन का नुकसान हो चुका है. यही स्थिति आगे भी बनी रही तो उत्तर बंगाल में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है.
अधिकतर परियोजनाएं ठप, उत्पादन में 40 फीसदी कमी
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि जलढाका स्टेज-1 में 36, स्टेज-2 में आठ, रम्माम हाइडेल प्रोजेक्ट में 51, कालीखोला प्रोजेक्ट में तीन, हाजी में तीन, रिंगथोंग में दो, एलआरएचपी में दो, तथा सिद्रापोम में छह मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है. जितनी छोटी परियोजनाएं है उनमें काम पूरी तरह से ठप हो गया है. आगजनी की वजह से बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक ढांचागत सुविधाएं खाक हो गयी हैं. जिन परियोजनाओं को कम नुकसान हुआ है, वहां मरम्मत कराकर बिजली का उत्पादन हो सकता है लेकिन कर्मचारियों की कमी की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है.
डर से कर्मचारी काम पर नहीं जाना चाहते
आंदोलनकारियों के डर से कर्मचारी काम पर नहीं जाना चाहते. सिलीगुड़ी सहित उत्तर बंगाल यहां तक की कोलकाता के भी काफी बिजली कर्मचारी पहाड़ स्थित बिजली परियोजनाओं में काम करते थे. अब सभी डरकर वापस आ गये हैं. बिजली अधिकारियों के अनुसार पहाड़ पर बिजली परियोजनाओं के बंद होने से उत्पादन में कमी आयी है, लेकिन विभागीय अधिकारी उत्तर बंगाल सहित पहाड़ पर भी बिजली आपूर्ति सामान्य रखने की कोशिश कर रहे हैं. दक्षिण बंगाल स्थित विभिन्न बिजली परियोजनाओं से बिजली यहां मंगवायी जा रही है.

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