कोलकाता : साफ-सफाई की जिम्मेदारी केवल सरकार व प्रशासन की ही नहीं, बल्कि आम लोगों की भी है. लोगों को केवल अपने घरों की ही नहीं, बल्कि आसपास व पड़ोस की सफाई पर भी ध्यान देने की जरूरत है. अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है. साथ ही स्वच्छता के लिए सख्त कानून बनाना जरूरी है. गंदगी फैलानेवालों पर यदि जुर्माने का डर होगा तो उनकी आदत में सुधार जरूर होगी. यह बातें ‘प्रभात खबर’ की ओर से आयोजित परिचर्चा ‘प्रभात खबर जनसंवाद’ में बड़ाबाजार इलाके के लोगों ने कहीं.
कृष्ण प्रताप सिंह (समाजसेवी) : स्वच्छता को लेकर लोगों में और चेतना लाने की जरूरत है. जिस तरह हम साफ कपड़ा पहनना पसंद करते हैं ठीक उसी तरह हमें अपने आसपास के इलाकों को भी स्वच्छ रखना चाहिए. बड़ाबाजार में स्वच्छता के लिए जागरूकता की काफी जरूरत है. जागरूकता अभियान के लिए छोटी-छोटी टोली बनायी जाये. इसमें स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाये. इधर-उधर कचरा फेंकनेवालों को रोका व टोका जाये. स्वच्छता के जरिये ही बीमार मुक्त कोलकाता बनाया जा सकता है. साथ ही स्वच्छता के लिए कड़ा कानून बने.
राजेश सिन्हा (सामाजसेवी) : मैं पॉलिथीन का व्यवहार नहीं करता. पॉलिथीन स्वच्छता को लेकर सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है. अधिकार के लिए लोग आंदोलन कर सकते हैं लेकिन बात यदि स्वच्छता और साफ-सफाई की हो तो इसकी जिम्मेदारी केवल सरकार व प्रशासन पर क्यों थोप देते हैं? यदि हम अपने आसपास की साफ-सफाई करें तो इसका फायदा सबसे पहले हमें ही मिलेगा. स्वच्छता के लिए सख्त कानून बनाये जाने की जरूरत है. यदि कोई गंदगी फैलाता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाये. जब तक जुर्माने का भय नहीं होगा तब तक गंदगी फैलाने वालों की आदत में सुधार नहीं होने वाला है.
सचिन त्रिपाठी (समाजसेवी) : साफ-सफाई के लिए हर गली में 11 सदस्यीय टीम बनायी जाये जो इसको लेकर काम करे, लोगों को जागरूक करे, इधर-उधर गंदगी फैलानेवालों को रोके. जागरूकता के लिए नुक्कड़ सभा भी हो. स्वच्छता के लिए सख्त कानून बने. प्रशासन के भरोसे बैठने से परिवेश साफ नहीं होगा बल्कि हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ेगी.
सागर प्रसाद माली (समाजसेवी) : सरकार व प्रशासन अपने स्तर पर साफ-सफाई की व्यवस्था कर रही है लेकिन क्या आम लोग अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? लोग ही तो इधर-उधर कचरा फेंकते हैं और फिर आलोचना करते हैं. हमें अपने घर के साथ इलाकों की सफाई की जिम्मेदारी लेनी होगी. साफ-सफाई के लिए एक सख्त कानून बने. गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगे ताकि वह अगली बार गलती करने के पहले सोचने को मजबूर हो.
सुनील राय (समाजसेवी) : महात्मा गांधी ने कहा था कि स्वच्छता ईश्वर का दूसरा रूप है. तो स्वच्छता की जिम्मेदारी किसकी है? साफ-सफाई के लिए पहले हमें खुद को पहले जागरूक होने की जरूरत है. देश हमारा है और इसे स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है. केवल खास मौके पर सफाई अभियान नहीं चले, यह दिनचर्या का हिस्सा बने.
विलय गोस्वामी (समाजसेवी) :शिक्षा की कमी ही अस्वच्छता का कारण नहीं है बल्कि कई शिक्षित लोग भी गंदगी फैलाते हैं. गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानून भी बनाने की आवश्यकता है.
परिचर्चा में मोहम्मद अफसर, जे सिंह, प्रमोद विश्वास समेत अन्य गणमान्य मौजूद रहे.
