कोलकाता. बंगाल में पाट किसानों को केंद्र सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से वह समर्थन मूल्य के नीचे पाट बेच रहे हैं. समर्थन मूल्य से नीचे बिकना इनके लिए चिंता का कारण बन गया है.
जूट कारोबारियों के अनुसार जूट की फसल के अनुरूप अधिक आंकलन का असर किसानों पर पड़ा है. सूत्रों के अनुसार जूट फसल को लेकर विभिन्न सरकारी तथा पंजीकृत संस्थानों का अलग-अलग आंकलन से भ्रम की स्थिति पैदा हो गयी है. कृषि विभाग, जूट बेलर्स एसोसिएशन (जेबीए), इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन और जूट एडवाइजरी बोर्ड (जेएबी) जूट फसल का आंकलन करता है. सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आग्रह व उत्साह पर किसानों ने पिछले साल करीब एक करोड़ बेल जूट का उत्पादन किया था. जूट एडवाइजरी बोर्ड के अनुसार इस साल उत्पादन घट कर 85 लाख बेल हो गया है.
सूत्रों का कहना है कि जूट का नया सीजन शुरू होने से पहले गत मार्च से जूट (टीडी-6) समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 3500 रुपए से करीब 300 रुपए नीचे बिक रहा है. जूट के एक कारोबारी के अनुसार मुकाम में ही जूट प्रति क्विंटल 3350 रुपए बिक रहा है. कोलकाता में इसकी कीमत करीब 3800 रुपये होनी चाहिए.
आरोप है कि भारतीय जूट निगम (जेसीआइ) किसानों से जूट खरीदने के मुद्दे पर खरा नहीं उतर पाया. पिछले साल जेसीआई ने 4 लाख क्विंटल में से केवल एक लाख क्विंटल जूट समर्थन मूल्य पर खरीदा. शेष तीन लाख क्विटंल जूट की खरीदारी वाणिज्यिक रूप से होना बताया जा रहा है. पहली जुलाई से जूट का नया सीजन शुरू हुआ. पर सीजन में जूट का भाव अभी भी नहीं निकाला गया. जूट बेलर्स एसोसिएशन अभी भी गत वर्ष का भाव निकाल रहा है. इससे किसानों में और असमंजस की स्थिति पैदा होती जा रही है.
