सिलीगुड़ी. मानवाधिकार के लिए कार्य करने वाले एक स्वयंसेवी संगठन के हस्तक्षेप के बाद कुछ मजदूरों को उनके बकाया वेतन का भुगतान हो सका. मामला सिलीगुड़ी के एक नर्सिंग होम का है.
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट एंड क्राइम कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की पहल ने करीब एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को वेतन देने में मदद की. इस संगठन के अध्यक्ष रमेश साह ने बताया है कि नर्सिंग होमों में मैन पावर का सप्लाय करने वाली कोलकाता की एक कंपनी ने कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी की. उस कंपनी ने सिलीगुड़ी के एक नर्सिंग होम में करीब बीस कर्मचारी को काम पर लगाया था.
डेढ़ महीना काम कराकर कंपनी ने कर्मचारियों की छुट्टी कर दी. इसके बाद नर्सिंग होम ने दूसरे कर्मचारियों को नियुक्त कर लिया. जबकि कंपनी ने हटाए गए कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया. सभी कर्मचारी बहुत ही गरीब और दलित थे जो नर्सिंग होमों में सफाई का काम करके परिवार का भरन-पोषण करते थे. श्री साह ने आगे बताया कि यह सब वेतन दिलाने के लिए कई लोगों पास गए,लेकिन किसी ने इनकी मदद नहीं की. उसके बाद ही सभी कर्मचारियों ने उनके मानवाधिकार संगठन से संपर्क किया और उन्होंने कर्मचारियों को वेतन दिलाने में मदद की.
श्री साह ने बताया कि उन्होंने कोलकाता में कंपनी के हेड ऑफिस से संपर्क किया. कंपनी के मालिकों से बात की गयी. उसके बाद वह कर्मचारियों को बकाया वेतन देने पर सहमत हो गये. मंगलवार को कोलकाता से कंपनी की की एक टीम आई थी. उसके बाद कर्मचारियों के बकाया राशि का भुगतान किया गया. इस मौके पर संगठन के उत्तर बंगाल जोन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पुनिया, सिलीगुड़ी सब-डिवीजन महिला अध्यक्ष बीना कामती, गौरी दास और अन्य सदस्य भी मौजूद थे.
