उन्होंने बताया कि कुछ साजिश कर रहे थे, जिसके बीच में जिलाधिकारी आ गए. उनका यह तबादला दिखाकर ही डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया जा रहा है. अब यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसा क्यों किया गया. पहले लोगों का मानना था कि उत्तर दिनाजपुर में ही इस तरह की राजनीतिक साजिशो होती है लेकिन जिलाधिकारी के तबादले ने सभी अधिकारियों को एक गलत संकेत दिया. उन्होंने बताया कि इस अशुभ संकेत को मिटाने के लिए जिलावासियों को एकजुट होना होगा. उन्होंने बताया कि पंचायत चुनाव के बाद इसी तरह से अनेक अधिकारियों का तबादला होगा.
ऐसे में स्वाभाविक परिस्थितियों में तबादला होने पर कुछ नहीं होता, लेकिन अचानक इस तरह के निर्णय को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. गत 15 जुलाई को सौरभ गांगुली द्वारा उनकी अपनी मूर्ति का अनावरण को लेकर गौतम गोस्वामी ने बताया कि यह मूर्ति जिला क्रीड़ा संस्था के कार्यालय में ढककर रखी गयी है. किसी अनुमति की परवाह किए बिना यह मूर्ति पहले भी लगाई जा सकती थी. प्रशासन की अनुमित के बिना पहले भी मूर्ति यथास्थान में नहीं लगाई गई. नियम के तहत ही आवेदन किया गया.
गौरतलब है कि दक्षिण दिनाजपुर जिला क्रीड़ा संस्था के प्रयास से बालूरघाट स्टेडियम के प्रवेशद्वार के अंदर खुले आसमान के नीचे सौरभ गांगुली की मूर्ति स्थापित करने के लिए एक जगह की पहचान की गई. इसके मुताबिक काम शुरू हुआ. निर्धारित जगह में ढांचे को पूरा कर लिया गया, लेकिन इसबीच इस जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ. क्योंकि इस जमीन की पहचान की गई यह जमीन सरकारी बताई गई. इसके बाद सत्ता दल के प्रतिनिधि व राजनीतिक खेल से यह जटिलता और बढ़ती गई. पदाधिकारी के मुताबिक जिलाधिकारी जिला क्रीड़ा संस्था के अध्यक्ष होते हैं.
इसके बावजूद उन्होंने निर्धारित जगह में मूर्ति लगाने की अनुमति नहीं दी. इसे लेकर पिछले कुछ दिनों से जिला क्रीड़ा संस्था व प्रशासन के बीच खींचतान चलती रही, लेकिन कोई हल नहीं निकला. आखिरकार क्रिकेटर सौरभ गांगुली निर्धारित दिन दक्षिण दिनाजपुर पहुंचे. शनिवार तड़के पांच बजे करीब पदातिक एक्सप्रेस से वह मालदा पहुंचे. वहां से बुनियादपुर में सर्किट हाउस में पहुंचे रविवार सुबह को गंगारामपुर स्टेडियम में पहुंचे जहां स्थानीय नगरपालिका व कई संस्थाओं की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया.
