कचरे के ढेर पर सिलीगुड़ी, नहीं बदल रही सूरत

सिलीगुड़ी: इन दिनों पूरा सिलीगुड़ी कचरे के ढेर पर है. आलम यह है शहर की अधिकतर मुख्य सड़कें डंपिंग ग्राउंड में तब्दील होती जा रही हैं. सिलीगुड़ी नगर निगम के वर्तमान बोर्ड की लाख कोशिशों के बावजूद शहर की सूरत सुधरने का नाम नहीं ले रही. यूं कहें तो निगम का ‘स्वछ और सुंदर सिलीगुड़ी’ […]

सिलीगुड़ी: इन दिनों पूरा सिलीगुड़ी कचरे के ढेर पर है. आलम यह है शहर की अधिकतर मुख्य सड़कें डंपिंग ग्राउंड में तब्दील होती जा रही हैं. सिलीगुड़ी नगर निगम के वर्तमान बोर्ड की लाख कोशिशों के बावजूद शहर की सूरत सुधरने का नाम नहीं ले रही. यूं कहें तो निगम का ‘स्वछ और सुंदर सिलीगुड़ी’ मुहिम भी अब टांय-टांय फिस्स साबित हो चुकी है.
निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत सिलीगुड़ी को ‘स्वच्छ और सुंदर’ बनाने के लिए हाल के महीनों में ही मुहिम का आगाज किया था. इसके लिए निगम ने शहरवासियों के बीच जनजागरूकता फैलाने के लिए सिलीगुड़ी के अंतरराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त क्रिकेटर रिद्धिमान साहा को इस मुहिम का ब्रांड अंबेसडर भी बनाया. लेकिन रिद्धिमान आज तक निगम के इस मुहिम में कभी शामिल नहीं हुए और निगम की मुहिम भी दिन बीतते-बीतते लकवाग्रस्त होती नजर आ रही है. निगम की लापरवाही कहें या फिर मजबूरी, हाल के दिनों में सिलीगुड़ी में साफ-सफाई नियमित नहीं हो रही. बीते कुछ रोज से कचरे का ढेर शहर में कई जगहों पर दिन भर पड़ा रहता है.

कचरे के अंबार को उठानेवाला कोई नहीं है. शहर के नौ नंबर वार्ड का मुख्य सड़क एसएफ रोड स्थित सिलीगुड़ी हिंदी हाइ स्कूल के सामने स्थित काली मंदिर के पास सड़क किनारे बीते कई रोज से डाब के कचरे का ढेर लगा है. इसी तरह सात नंबर वार्ड के विवेकानंद रोड, सेवक रोड, कंचनजंघा स्टेडियम के सामने विधान रोड, पंजाबीपाड़ा, हिलकार्ट रोड पर कचरे का ढेर शहर की सूरत को बिगाड़ने के लिए काफी है.

निगम क्षेत्र के कई वार्ड बस्ती बहुल इलाके हैं. इन वार्डों की हालत तो और भी खस्ता है. इन वार्डों के बस्तीवासियों का तो जीना ही दुभर हो रखा है. इन वार्डों के जो भी रास्तों से गुजरे लोग नोक-मुंह सिकौड़े या फिर नाक पर रुमाल रखकर कतयी नहीं चल सकते. शहरवासियों का कहना है कि बाहर से आनेवाले लोग शहर की यह हालत देखकर तरह-तरह की बातें करते हैं इससे हमारा ही सिर शर्म से नीचा हो जाता है. वार्ड नंबर चार के वासिंदा मोहम्मद कलाम का कहना है कि न तो सड़क और न ही ड्रेन-नालों की नियमित सफाई होती है. और न ही नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर व तेल का छिड़काव और फॉगिंग होती है. इस वजह से मच्छर दिन में ही डंक मारने से बाज नहीं आते. इन दिनों कचरे के बदबू के साथ-साथ मच्छरों का उत्पात भी काफी बढ़ गया है. निगम में विरोधी दल के तृणमूल कांग्रेस (तृकां) के नेता सह 20 नंबर वार्ड के पार्षद रंजन सरकार उर्फ राणा दा ने भी निगम की वर्तमान वाम बोर्ड की कार्य पद्धति पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि मेयर को पहाड़ की राजनीति करने से ही फुरसत नहीं है वह क्या निगम की जनता का ख्याल रखेंगे.
उन्होंने कहा कि शहर में नागरिक परिसेवा पूरी तरह ठप है. न तो साफ-सफाई नियमित रुप से हो रही है और न ही लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिल रहा है. उन्होंने मेयर से कुर्सी छोड़ने और वाम बोर्ड को रद्द करने की एक बार फिर आवाज उठायी है. इसके लिए जल्द तकां के पार्षदों द्वारा निगम में लगातार आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है. इन सभी आरोपों को लेकर निगम के सफाई विभाग के मेयर परिषद सदस्य (एमएमआइसी) मुकुल सेनगुप्त व डिप्टी मेयर रामभजन महतो से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क साधा गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका.

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