सिलीगुड़ी. पहाड़ पर गोरखालैंड अलग राज्य की लगी आग एकमात्र ममता सरकार की देन है. मां-माटी-मानुष की तृणमूल कांग्रेस (तृकां) द्वारा बार-बार भाजपा को बेवजह घसीटा जा रहा है. दार्जीलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखालैंड आंदोलन से भाजपा का कोई ताल्लुक नहीं है. गोरखालैंड के नाम पर विरोधी भाजपा को बेवजह बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं. यह कहना है भाजपा के सिलीगुड़ी इकाई के महासचिव अभिजीत राय चौधरी का.
प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि भाजपा अमन-चैन, विकास और सामाजिक सद्भाव की राजनीति पर विश्वास करती है तुष्टिकरण की राजनीति पर नहीं. श्री चौधरी का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार पहाड़ की समस्या निदान के लिए तत्पर है लेकिन पहले राज्य सरकार को ही आगे बढ़ना होगा. उन्होंने राज्य सरकार को पहले पहाड़ पर शांति-सुरक्षा कायम करने की नसिहत दी और कहा कि तभी केंद्र सरकार हर संभव सहयोग के लिए तैयार होगी.
उनका कहना है कि पहाड़ की वर्तमान समस्या का निदान त्रिपक्षीय बातचीत से ही एकमात्र संभव है. अगर इसका जल्द निदान नहीं हुआ तो इसका प्रतिकूल प्रभाव पहाड़ के साथ-साथ समतल पर भी पड़ेगा. इसकी वजह दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र भौगोलिक दष्टि से काफी संवेदनशील इलाका है. पूर्वोत्तर भारत का चिकन नेक माना जानेवाला संवेदनशील इलाका यही है. दार्जिलिंग जिला से पड़ोसी देश नेपाल की तकरीबन 110 किमी अंतरराष्टीय सीमा है. वहीं बांग्लादेश की 30 किमी और भूटान की 19 किमी लगी हुई है. इतना ही नहीं, हाल के दिनों में चीन द्वारा बार-बार किया जा रहा अंतरराष्ट्रीय सीमा उल्लंघन सिक्किम का ‘डोकलाम’ की दूरी सिलीगुड़ी से मात्र 25-30 किमी है. वहीं, दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के कालिम्पोंग जिले बिल्कुल सटा हुआ है. भाजपा के जिला उपाध्यक्ष नंदन दास ने भी श्री चौधरी के बयानों का समर्थन करते हुए कहा है कि देश की एकमात्र राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टी भाजपा अपने आदर्श और सिद्धांतों पर चलनेवाली पार्टी है.
उन्होंने शुक्रवार को अखबार में गोरखालैंड के मुद्दे पर छपी खबर पर एतराज जताते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है.
