सिक्किम के मुख्यमंत्री का जलाया पुतला
सिलीगुड़ी. बंगाल के बंटवारे की मांग के विरोध में बांग्ला व बांग्ला भाषा बचाओ कमिटी की तरफ से वीनस मोड़ पर गुरुवार को धरना-प्रदर्शन के जरिये प्रतिवाद किया गया. इस दौरान गोरखालैंड का समर्थन करने के चलते सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग का पुतला दहन किया गया. संगठन की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री […]
सिलीगुड़ी. बंगाल के बंटवारे की मांग के विरोध में बांग्ला व बांग्ला भाषा बचाओ कमिटी की तरफ से वीनस मोड़ पर गुरुवार को धरना-प्रदर्शन के जरिये प्रतिवाद किया गया. इस दौरान गोरखालैंड का समर्थन करने के चलते सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग का पुतला दहन किया गया. संगठन की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने मर्यादाओं का उल्लंघन करते हुए गोरखालैंड आंदोलन का समर्थन किया है, जबकि वे खुद ही ‘विदेशी’ नागरिक हैं.
संगठन ने गोरखालैंड राज्य के आंदोलन का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि 1950 के भारत-नेपाल समझौते की आड़ में नेपाल के निवासी दार्जीलिंग जिले के पार्वत्य क्षेत्र में आकर बस गये. वे भारतीय नागरिक हैं ही नहीं.
यदि भारतीय नागरिकता का सर्वेक्षण किया जाये, तो यह स्पष्ट हो जायेगा. विज्ञप्ति में यह कहा गया है कि बंगाल ने नेपाल किसी हिस्से पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाली समुदाय ने पहाड़ पर दखल कर लिया. यदि ये लोग भारतीय नेपाली हैं तो उत्तराखंड राज्य में गोरखालैंड राज्य की मांग क्यों नहीं कर रहे हैं.