गोरखालैंड आंदोलन : मन घीसिंग ने कहा, छठी अनुसूची अब पुरानी बात हुई
दार्जिलिंग : अब छठी अनुसूची नहीं, गोरखालैंड चाहिए. यह बात गोरामुमो प्रमुख मन घीसिंग ने कही है. अलग राज्य गोरखालैंड गठन की मांग को लेकर गोरामुमो ने बुधवार को शहर से करीब चार किलोमीटर दूर डाली फाटक से एक रैली निकाली.
रैली ने राष्ट्रीय मार्ग 55 होते हुए शहर की रेलवे स्टेशन होकर लाडेनला रोड होते हुये चौरास्ता रोड होकर फिर क्लब स्टैंड पहुंची. शहर के क्लब स्टैंड पर पहुंचते ही गोरामुमो की रैली पथसभा में परिणत हुई. उल्लेखनीय है कि बीते दो दिनों से गोजमुमो लगातार यह मांग कर रहा था कि गोरामुमो अपना रुख स्पष्ट करे.
वह बताये कि उसे छठी अनुसूची चाहिए या गोरखालैंड. पथ सभा को सम्बोधित करते हुए गोरामुमो प्रमुख मन घीसिंग ने कहा कि अब हमें छठी अनुसूची नहीं, बल्कि गोरखालैंड चाहिए. छठी अनुसूची पुरानी बात हो चुकी है, परंतु कतिपय राजनीतिक दलों ने हम लोगों के नाम पर छठी अनुसूची को जिंदा रखा है. छठी अनुसूची पर हमारी पार्टी ने समझौता किया था, परंतु काफी समय बीत जाने के बावजूद सरकार ने उक्त समझौते को कार्यरूप में परिणत नहीं किया.
इसलिए हमलोग छठी अनुसूची को छोड़कर गोरखालैंड के लिए सड़क पर उतरे हैं. श्री घीसिंग ने कहा कि गोरखालैंड के लिए सभी दल एक मंच पर आ चुके हैं. उन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ को छोड़कर एकसूत्री मांग गोरखालैंड की प्राप्ति को लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि गोरखालैंड प्राप्ति को लेकर एक सर्वदलीय बैठक की गयी थी, जिसमें एक कमिटी बनायी गयी है.
इस कमिटी में सभी दलों से दो-दो सदस्यों को शामिल किया गया है. गोरामुमो की ओर से पार्टी प्रवक्ता नीरज जिम्बा और एनबी छेत्री का चयन किया गया है. अन्य दलों से भी जल्द ही सदस्यों को शामिल कर गोरखालैंड के मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत की जायेगी.
क्रामाकपा ने ममता के बयान को लालू जैसा बताया
दार्जिलिंग : केंद्र सरकार जब तक अलग राज्य गोरखालैंड पर वार्ता शुरू नहीं करेगी, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा. यह बात गोजमुमो की केन्द्रीय कमिटी के सदस्य तिलकचन रोका ने कही.
अलग राज्य गोरखालैंड गठन की मांग को लेकर गोजमुमो ने विगत दिनों की तरह बुधवार को भी शहर में रैली निकाली. रैली शहर की परिक्रमा करते हुए चौक बाजार पहुंची और पथ सभा में तब्दील हो गयी. पथ सभा को सम्बोधित करते हुए श्री रोका ने कहा कि गोरखालैंड आंदोलन किसी एक राजनीति दल का नहीं है, यह आंदोलन जनता कर रही है. इसलिए इस आन्दोलन पर केन्द्र सरकार को भी सोचना होगा.
जब तक केन्द्र सरकार गोरखालैंड को लेकर वार्ता शुरू नहीं करेगी, तब तक यह आन्दोलन जारी रहेगा.इसी तरह से पथ सभा को क्रामाकपा के केन्द्रीय प्रवक्ता गोविन्द छेत्री ने सम्बोधित करते हुये कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल विभाजन नहीं होने की बात कही है. इसी तरह का बयान लालू प्रसाद यादव ने भी दिया था परन्तु 6 महीने के बाद बिहार से अलग राज्य झारखंड का गठन हुआ.
अपने संबोधन में गोरखालैंड राज्य निर्माण मोरचा के अध्यक्ष दावा पाखरिन ने कहा कि बंगाल ने दार्जीलिंग को त्याग दिया है और चल रहे आन्दोलन से दिल्ली भी हिल रही है, लेकिन यह आंदोलन गोरखालैंड प्राप्ति तक जारी रहेगा.
उन्होंने कहा कि आन्दोलन लोकतान्त्रिक रूप से आगे बढ़ता रहेगा. यदि स्थिति इसी तरह की बनी रही तो गोरखालैंड ज्यादा दूर नहीं है.
