पहाड़ पर जारी आंदोलन को लेकर इसबार राज्य सरकार का रवैया भी सख्त है. सरकार के निर्देश पर पुलिस प्रशासन ने गोरखालैंड आंदोलनकारियों पर उत्तेजना फैलाने, लोगों को भड़काने, हत्या करने, सरकारी कर्मचारियों पर जानलेवा हमला करने, सरकारी और गैर-सरकारी संपत्तियों में तोड़-फोड़, आगजनी आदि के मामले दायर किये हैं.
गोरखालैंड आंदोलन: दार्जीलिंग जिले में 25 और कालिम्पोंग जिले में 11 मामले, विभिन्न थानों में मोरचा पर 36 मामले दायर
सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) का गोरखालैंड आंदोलन 25वें दिन और बेमियादी हड़ताल 19वें दिन में पहुंच गया है. इस दौरान मोरचा आंदोलनकारी सीधे राज्य सरकार से भिड़ रहे हैं. मोरचा के इस आंदोलन में अब-तक पुलिस फायरिंग में तीन आंदोलनकारी मारे गये. वहीं एक मालवाहक ड्राइवर अनिकेत छेत्री को आंदोलनकारियों […]

सिलीगुड़ी: दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखा जनमुक्ति मोरचा (गोजमुमो) का गोरखालैंड आंदोलन 25वें दिन और बेमियादी हड़ताल 19वें दिन में पहुंच गया है. इस दौरान मोरचा आंदोलनकारी सीधे राज्य सरकार से भिड़ रहे हैं. मोरचा के इस आंदोलन में अब-तक पुलिस फायरिंग में तीन आंदोलनकारी मारे गये. वहीं एक मालवाहक ड्राइवर अनिकेत छेत्री को आंदोलनकारियों ने जलाकर मार डाला. इसके अलावा कई आंदोलनकारी और दर्जनों पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं.
दार्जिलिंग जिला पुलिस सूत्रों से मिले आंकड़ों के आंकड़ों के अनुसार, दार्जीलिंग पर्वतीय क्षेत्र के विभिन्न थानों में मोरचा के विरुद्ध पुलिस ने एक जुलाई यानी शनिवार तक कुल 36 मामले दायर किये हैं. इनमें दार्जीलिंग जिला अंतर्गत 25 और कालिंपोंग जिला क्षेत्र में 11 मामले दायर किये गये हैं. इनमें मोरचा सुप्रीमो विमल गुरूंग, उनकी पत्नी सह नारी मोरचा की नेता आशा गुरुंग और मोरचा के केंद्रीय कमेटी के प्रमुख सदस्य विनय तामांग के विरुद्ध विभिन्न थानों में आठ मुकदमे नामजद हैं. इनके अलावा भी कई शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ता नामजद हैं. और इसके तहत उन्हें ‘वांटेड’ जारी कर दिया गया है. मोरचा के शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दायर होने के बावजूद पुलिस प्रशासन फिलहाल किसी को भी गिरफ्तार करने की हिमाकत नहीं कर रही.
इसकी वजह को लेकर एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि अभी पहाड़ पर हिंसक आंदोलन में कमी आयी है. मोरचा के रैली और प्रदर्शन में अब पहले जैसी भीड़ भी इकट्ठी नहीं हो रही. इस स्थिति में अगर मोरचा के किसी भी आरोपी नेता या कार्यकर्ता को गिरफ्तार करने का मतलब है आंदोलनकारी वापस हिंसक हो उठेंगे और उनके हाथों में आग्नेयास्त्र चलें आयेंगे. इसलिए पुलिस प्रशासन पहाड़ पर अशांत माहौल को सामान्य होने का इंतजार कर रही है. स्थिति नियंत्रण में आते ही नामजद आरोपी मोरचा नेताओं की धर-पकड़ की जायेगी. पुलिस किसी भी आरोपी को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगी. इस मुद्दे पर दार्जिलिंग जिला के पुलिस अधिक्षक (एसपी) अखिलेश चतुर्वेदी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.