इस घटना के दो दिन बाद ही ग्वालपोखर ब्लॉक के कानकी ग्राम पंचायत में सरकारी कर्मचारियों को समय पर कार्यालय नहीं आने का मामला सामने आया है. स्थानीय लोगों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कार्यालय को समय पर खोल तो दिया जाता है, लेकिन अधिकांश कर्मचारी नदारद रहते हैं. कई तो देर से आते हैं और कई आते ही नहीं. इस मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन की ओर से औचक निरीक्षण के लिए अधिकारियों की एक टीम भेजी गई.
अधिकारियों ने पाया कि पंचायत कार्यालय तो खुला हुआ है, लेकिन अधिकांश कर्मचारी गायब हैं. उसके बाद इस पंचायत कार्यालय के सभी कर्मचारियों को जिला प्रशासन की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और एक महीने के अंदर जवाब देने के लिए कहा गया है. जिला प्रशासन सूत्रों का कहना है कि जिले के अधिकांश ग्राम पंचायतों की यही स्थिति है. जिला प्रशासन ने इसे एक गंभीर चुनौती मानते हुए सभी कार्यालयों में कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है.
सूत्रों ने बताया कि अधिकांश सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम शुरू किया जायेगा. जिला प्रशासन सूत्रों ने आगे बताया कि 11 बजे अधिकारियों की एक टीम कानकी ग्राम पंचायत कार्यालय गई थी. उस समय वहां कोई भी कर्मचारी काम पर नहीं आया था. जबकि इस ग्राम पंचायत में छह सरकारी कर्मचारी हैं. सिर्फ चपरासी को ही काम पर देखा गया. उसके बाद सभी छह कर्मचारियों को जिला प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया गया है. इस मामले में जिला अधिकारी आयशा रानी का कहना है कि ग्राम पंचायत कार्यालय में कर्मचारियों के देरी से आने की शिकायत काफी दिनों से मिल रही थी. उसके बाद ही औचक निरीक्षण कराने का निर्णय लिया गया. कर्मचारियों की लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जायेगी. बायोमेट्रिक एटेंडेंस सिस्टम लगाये जा रहे हैं.
