पहले देश में कई प्रकार की कर व्यवस्थाएं थी. सेंट्रल एक्साइज, वैट, सर्विस टैक्स, इंटरटेनमेंट टैक्स, सीवीडी, एसएडी आदि न जाने कितने प्रकार के टैक्स लगते थे. अब इन सभी टैक्स को खत्म कर दिया गया है. सिर्फ एक टैक्स जीएसटी अस्तित्व में आ गया है. उन्होंने कहा कि जीएसटी देश के सभी राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू हो जायेगा. ऐसे कारोबारी जिनका वार्षिक टर्नओवर 20 लाख रुपये से कम है, उन्हें जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है.
अरुणाचल प्रदेश, असम, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के लिए यह सीमा 10 लाख रुपये की है. उन्होंने आगे कहा कि अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग जीएसटी लेने की जरूरत पड़ेगी. टैक्स का दर पांच प्रतिशत, 12, प्रतिशत, 18 प्रतिशत तथा 28 प्रतिशत रखा गया है. पैन के जरिये जीएसटी का रजिस्ट्रेशन लिया जा सकता है. उन्होंने आगे कहा कि कारोबारियों को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद महीने में तीन रिटर्न भरने पड़ेंगे. इसके अलावा 31 दिसंबर को वार्षिक रिटर्न भी भरना होगा. कंपोजिट डीलर तिमाही तथा एक वार्षिक रिटर्न भर सकते हैं. श्री गोयल ने कहा कि जीएसटी के कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं, जिसे जानना बेहद जरूरी है. 180 दिनों के अंदर सप्लायर को भुगतान नहीं होता है तो इनपुट क्रेडिट की सुविधा नहीं मिलेगी. रिटर्न नहीं भरने पर भी इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा. श्री गोयल ने इनपुट क्रेडिट के विभिन्न पहलुओं की भी जानकारी दी.
उन्होंने आगे कहा कि जीएसटी के कुछ प्रावधान से व्यवसायियों को थोड़ी परेशानी हो सकती है. इसलिए व्यवसायियों को पूरी जानकारी इसके बारे में ले लेनी चाहिए. उन्होंने आगे बताया कि सिलीगुड़ी तथा उत्तर बंगाल में मध्यम श्रेणी का कारोबार होता है. यहां अभी भी ऐसे डीलरों की संख्या काफी है, जिनके पास कंप्यूटर, ऑनलाइन फाइलिंग, कंप्यूटर विलिंग आदि की सुविधा नहीं है. काफी संख्या में डीलर टैक्स एक्सपर्ट की सलाह भी नहीं लेते. इसकी वजह से कई बार व्यवसायियों को पैनाल्टी आदि से भी जूझना पड़ता है. उन्होंने जीएसटी सिस्टम का स्वागत किया और सरकार से जीएसटी अपनाने की दिशा में कारोबारियों को पूर्ण सहयोग देने की अपील की.
