सिर्फ आपदा में ही सक्रिय नहीं रहते एनडीआरएफ वाले, लंगर भी लगाते हैं

देवदूत सिर्फ आपदा के समय ही लोगों के बीच नहीं आते. धार्मिक आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं.

कोलकाताः किसी भी प्राकृतिक आपदा में सबसे पहले जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते हैं राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवान. इसलिए इन्हें देवदूत की संज्ञा दी गयी है. ये देवदूत सिर्फ आपदा के समय ही लोगों के बीच नहीं पहुंचते. सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.

प्राकृतिक आपदा हो या कोई बड़ी दुर्घटना, एनडीआरएफ के अधिकारी से लेकर जवान तक अपनी जान पर खेलकर लोगों की मदद करते हैं. दिन-रात एक कर देते हैं. जब स्थिति सामान्य होती है, तो वे भी सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं. एनडीआरएफ के सेकेंड बटालियन के जवानों ने गुरु अर्जुन देवजी का शहीदी दिवस मनाया.

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एनडीआरएफ के जवानों ने पश्चिम बंगाल के हरिनघाटा स्थित कैम्प के सामने जागुली रोड पर शहीदी दिवस के मौके पर आम लोगों के लिए ठंडा पानी और शर्बत का लंगर लगाया. एनडीआरएफ के कमांडेंट गुरमिंदर सिंह के नेतृत्व में लगाये गये इस लंगर में कैम्पस के सभी जवानों ने हिस्सा लिया.

गुरमिंदर सिंह ने अर्जुन सिंह की शहादत और उनकी सेवा भाव की चर्चा करते हुए कोरोना काल में लोगों से सामाजिक दूरी और कोरोना नियमों का पालन करने की अपील की. लोगों से आग्रह किया कि सभी मास्क पहनें, ताकि कोरोना से सुरक्षित रह सकें.उन्होंने जवानों को हर हाल में खुद को फिट रखने की सलाह दी, ताकि वे सदैव लोगों की मदद के लिए तैयार रह सकें.

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Posted By: Mithilesh Jha

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