शिक्षक आंदोलन में बच्चों के इस्तेमाल पर डब्ल्यूबीसीपीसीआर ने पुलिस से मांगी रिपोर्ट

उदयन पंडित की पाठशाला कार्यक्रम में बच्चों की विद्यार्थियों के रूप में उपस्थिति पर आपत्ति

उदयन पंडित की पाठशाला कार्यक्रम में बच्चों की विद्यार्थियों के रूप में उपस्थिति पर आपत्ति

कोलकाता. वेस्ट बंगाल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (डब्ल्यूबीसीपीसीआर) ने विकास भवन के सामने नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों के आंदोलन में बच्चों की संलिप्तता के संबंध में विधाननगर पुलिस कमिश्रनेट से रिपोर्ट तलब की है. आयोग ने शनिवार को विकास भवन के सामने हुए धरने में ‘उदयन पंडित की पाठशाला’ नामक कार्यक्रम में बच्चों की विद्यार्थियों के रूप में उपस्थिति पर आपत्ति जतायी है. डब्ल्यूबीसीपीसीआर के अनुसार, यह कदम संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन (यूएनसीआरसी) के विपरीत है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने विधाननगर पुलिस कमिश्नरेट से यह जानकारी मांगी है कि बच्चे आंदोलन में कैसे शामिल हुए. आयोग ने ‘उदयन पंडित की पाठशाला”” में भाग लेने वाले बच्चों की आयु सीमा, कार्यक्रम में उनकी भागीदारी का तरीका और किसके माध्यम से वे वहां पहुंचे, इन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है. गौरतलब है कि बेरोजगार शिक्षकों के विकास भवन के सामने चल रहे आंदोलन के दौरान शनिवार को उदयन पंडित की पाठशाला नामक एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 10 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों का एक समूह मौजूद था. आंदोलनकारी बेरोजगार शिक्षकों का कहना है कि चूंकि वे स्कूलों में पढ़ाने में असमर्थ हैं, इसलिए उन्होंने विरोध मंच पर ऐसा किया.आयोग का मानना है कि जब किसी मुद्दे पर आंदोलन चल रहा हो, तो वहां पाठशाला उस आंदोलन का ही हिस्सा है और बच्चों को ऐसे किसी भी आंदोलन का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता. इस बीच, यह भी बताया जा रहा है कि दिनभर आंदोलन में शामिल रहने वाले बेरोजगार शिक्षकों में कई माता-पिता भी हैं, जिनके बच्चे कभी-कभी उनसे मिलने आ जाते हैं. इसके अतिरिक्त, टीवी पर अपने शिक्षकों को परेशान देखकर भी कुछ बच्चे उनसे मिलने सड़कों पर पहुंच गये. इस तरह से बच्चों पर इस स्थिति का प्रभाव पड़ रहा है.

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By SANDIP TIWARI

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