कोलकाता.
नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (एनसीएससी) ने जादवपुर यूनिवर्सिटी (जेयू) के रजिस्ट्रार से कहा कि वह द्वितीय वर्ष के आइआर विभाग की छात्रा की एसोसिएट प्रोफेसर अरूप भट्टाचार्य के खिलाफ शिकायत के बाद की गयी कार्रवाई के बारे में तथ्य और जानकारी दें. प्रोफेसर अरूप भट्टाचार्य पर आरोप है कि उन्होंने संविधान के खिलाफ घृणा भरी टिप्पणी की और उसके अधिकार को नकारा. छात्रा ने दावा किया कि प्रो भट्टाचार्य ने कहा था : संविधान को फाड़ कर पानी में फेंक दो और उन्होंने बीआर आंबेडकर पर यह कहकर हमला किया कि आंबेडकर और उनकी संवैधानिक बहसों को पढ़ने का क्या फायदा है. एससी (शेड्यूल कास्ट) पैनल ने 30 दिसंबर को रजिस्ट्रार से सात दिनों के अंदर रिपोर्ट देने को कहा, जब छात्रा ने 27 दिसंबर को कमीशन को लिखकर प्रोफेसर के खिलाफ अपनी शिकायत के बारे में बताया और यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई एक्शन न लेने का आरोप लगाया. जेयू के आइआर विभाग ने 16 दिसंबर को एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनायी और छात्रा द्वारा शिकायत दर्ज कराने के 15 कार्य दिवस के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया. जेयू के एक अधिकारी ने बताया कि गत 16 दिसंबर से मुश्किल से आठ कार्यदिवस हुए हैं.इस संबंध में जेयू के वाइस चांसलर डॉ चिरंजीव भट्टाचार्य ने कहा कि यूनिवर्सिटी में हर कोई दीक्षांत समारोह में था. इसके अलावा साल के आखिर में छुट्टियां थीं, इसलिए कुछ देरी हुई है. इसे ध्यान में रखा जायेगा और जल्दी से निबटा जायेगा. छात्रा ने कहा कि विभाग या यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया. जांच पैनल को 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट देनी थी, लेकिन उन्होंने मुझे मेरे बयान के लिए नहीं बुलाया. पूरे 15 दिन बीत जाने के बाद भी उन्होंने रिपोर्ट नहीं दी है, इसीलिए मैंने एससी पैनल को मेल करके जेयू प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने और प्रोफेसर को सस्पेंड करने और उनसे सबके सामने माफी मांगने के लिए कहने का निर्देश देने को कहा.क्या कहना है जेयू के वीसी कावहीं, जेयू के वीसी ने कहा कि इस मसले पर कुछ गलतफहमी हो गयी है. वह जांच में सहयोग कर रहे हैं और पहले ही अपना पक्ष बता चुके हैं. एनसीएससी ने जेयू से कहा है कि अगर उसे जवाब नहीं मिला, तो कमीशन सिविल कोर्ट की दी गयीं शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है और आपको खुद या किसी प्रतिनिधि के जरिये कमीशन के सामने पेश होने के लिए समन जारी कर सकता है.
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