बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर बरसे शुभेंदु अधिकारी, राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ का लगाया आरोप

बांग्लादेश की सीमा से होने वाली घुसपैठ एक बार फिर पश्चिम बंगाल का बड़ा चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है. भारतीय जनता पार्टी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार के बार-बार के आग्रह के बावजूद राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार बीएसएफ को सीमा की घेराबंदी करने के लिए जमीन नहीं दे रही है.

कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते शुभेंदु अधिकारी (बीच में) व अन्य भाजपा नेता. फोटो : प्रभात खबर

बंगाल चुनाव 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने राज्य सरकार पर भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के काम में सहयोग न करने का आरोप लगाया है. साथ ही कहा है कि इसकी वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है.

भारत-बांग्लादेश सीमा की लंबाई 2216 किलोमीटर

शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 2,216 किलोमीटर है. बांग्लादेश की सीमा भारत में मेघालय, त्रिपुरा, असम और अन्य राज्यों से सटी है. इसमें से लगभग 1,600 किलोमीटर सीमा अकेले पश्चिम बंगाल में है. अन्य सभी सीमावर्ती राज्यों में बाड़ लगाने और सुरक्षा का काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह काम अभी भी नहीं हो पाया है.

सीमा की सुरक्षा में केंद्र का सहयोग नहीं कर रही राज्य सरकार – शुभेंदु

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह की कोशिशों के बावजूद पश्चिम बंगाल सरकार सीमा की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार का सहयोग नहीं कर रही. उन्होंने कहा कि जब भी अवैध घुसपैठ, जाली दस्तावेजों या आतंकवाद से संबंधित घटनाएं सामने आती हैं, तो राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस के नेता बार-बार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) पर आरोप लगाने लगते हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह से निराधार है.

मुख्यमंत्री लोगों को झाड़ू और रसोई के बर्तनों से बीएसएफकर्मियों पर हमला करने के लिए उकसाती हैं और उनके कुछ मंत्री भी बॉर्डर सिक्यूरिटी फोर्स के खिलाफ भड़काऊ बयान देते हैं.

शुभेंदु अधिकारी, लीडर ऑफ ऑपोजीशन, पश्चिम बंगाल विधानसभा

जमीन देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी – शुभेंदु अधिकारी

उन्होंने कहा कि सीमा पर बाड़ लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराना राज्य सरकार की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारी है. कानून है कि जिला प्रशासन जरूरी नोटिफिकेशन जारी करे और राज्य सरकार भूमि उपलब्ध कराये. केंद्र सरकार को इसके लिए सिर्फ जरूरी फाइनेंशियल सपोर्ट करना है.

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बंगाल को छोड़ अन्य राज्यों की सीमा पर लग चुके हैं कंटीले तार

शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि संसद में केंद्रीय गृह मंत्री ने सवालों के जो जवाब दिये हैं, उसमें स्पष्ट कहा गया है कि अन्य सभी राज्यों में सीमा पर बाड़ लगाने और सुरक्षा का काम पूरा हो चुका है. पश्चिम बंगाल में यह काम केवल इसलिए पूरा नहीं हो सका, क्योंकि ममता बनर्जी की सरकार ने जमीन नहीं दी.

  • अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्या प्रवासियों को बचा रही ममता बनर्जी सरकार, इसलिए सुरक्षा से खिलवाड़
  • केंद्र सरकार ने 8 बार बंगाल सरकार से संपर्क किया, गृह सचिव ने 5 बार दौरा किया, कोई नतीजा नहीं
  • विपक्ष के नेता की मांग- पश्चिम बंगाल सरकार राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में जमीन दे

कोर्ट ने भी मामले में किया है हस्तक्षेप

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप किया है. कोर्ट ने कहा है कि सीमा पर बाड़ लगाने के लिए आवश्यक भूमि 31 मार्च तक उपलब्ध करायी जानी चाहिए.

गृह मंत्री के अनुरोध के बाद भी ममता बनर्जी सरकार ने नहीं दी जमीन – अधिकारी

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भारत सरकार ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से 8 बार औपचारिक रूप से संपर्क किया है. केंद्रीय गृह सचिव व्यक्तिगत रूप से 5 बार पश्चिम बंगाल का दौरा कर चुके हैं. पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बिहार, झारखंड, ओडिशा और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में सहयोग करने का अनुरोध किया था. फिर भी बंगाल सरकार ने जमीन नहीं दी.

बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को संरक्षण दे रही बंगाल सरकार – शुभेंदु

शुभेंदु अधिकारी ने आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि जान-बूझकर की जा रही इस देरी का उद्देश्य अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्या प्रवासियों को संरक्षण देना है. ये दोनों राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं.

बीएसएफ को भूमि नहीं दे रही बंगाल सरकार

शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि बैरकपुर में एक सार्वजनिक बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को भूमि नहीं दे रही है. अधिकारी ने मांग की है कि राज्य सरकार राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए तुरंत भूमि उपलब्ध कराये.

भाजपा सरकार बनने पर ही रुकेगी बंगाल में घुसपैठ

उन्होंने कहा कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा की सरकार बनने पर ही घुसपैठ पर रोक सुनिश्चित हो सकेगी. शुभेंदु ने कहा कि लोगों को पता है कि सीमा पर कंटीली बाड़ लगाने के लिए जमीन राज्य सरकार को उपलब्ध करानी होगी. भाजपा नेता ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार भूमि का अधिग्रहण राज्य सरकार को ही करना होता है.

भाजपा सरकार 45 दिन में लगायेगी कंटीली बाड़ – शुभेंदु

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अमित शाह ने लोगों को आश्वासन दिया है कि आगामी विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा की सरकार बनने पर यह सुनिश्चित किया जायेगा कि सीमा पर 45 दिन में कंटीली बाड़ लगाने का काम पूरा हो जाये.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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