मां जगद्धात्री की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार

विश्वमाता मंदिर में देश विदेश के राजमहलों की मिट्टी भी पूजा में शामिल, सात समुद्रों के जल से हुआ स्नान

विश्वमाता मंदिर में देश विदेश के राजमहलों की मिट्टी भी पूजा में शामिल, सात समुद्रों के जल से हुआ स्नान

कोलकाता. उत्तर 24 परगना के न्यू बैरकपुर स्थित विश्वमाता मंदिर के संस्थापक समीरेश्वर ब्रह्मचारी द्वारा निर्मित की गयी मां जगद्धात्री की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार हुआ. विशेषता यह रही कि प्रतिमा के निर्माण और स्नान में देश-विदेश के सातों समुद्रों के जल और विभिन्न देशों की मिट्टी का प्रयोग किया गया है. ब्रह्मचारी ने बताया कि प्रतिमा पर कैलाश मानसरोवर के जल और पवित्र मिट्टी का लेप किया गया है. इसके अलावा मां की प्रतिमा का महास्नान प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, भारतीय महासागर, बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, दक्षिण सागर और उत्तर सागर के जल से संपन्न हुआ. उन्होंने कहा कि इंग्लैंड के बर्मिंघम पैलेस, स्पेन और नेपाल के राजमहलों सहित भारत के विभिन्न राजमहलों की मिट्टी भी प्रतिमा की पूजा में शामिल की गयी है.

शास्त्रानुसार, इस अनुष्ठान में सरस्वती सरोवर, वराहदंत, गजदंत, वल्मीक (दीमक की मिट्टी), अश्वदंत, नदी किनारे की मिट्टी, पर्वत शिखर, यज्ञशाला और मंदिरों की मिट्टी का प्रयोग किया गया. ब्रह्मचारी ने कहा कि मां विश्वमाता हैं, इसलिए पूजा में विश्व के सभी प्रमुख सागरों और नदियों का जल शामिल किया गया है. इसमें भूमध्य सागर, लाल सागर, इटली, कनाडा, इंग्लैंड, अमेरिका, रूस, बांग्लादेश और श्रीलंका की नदियों के जल को भी उपयोग में लाया गया है.

मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की है. विश्वमाता मंदिर की यह पूजा विश्वजननी पूजा के रूप में प्रसिद्ध है, जहां मां की आराधना विश्व के एकत्व और सर्वधर्म समभाव के प्रतीक के रूप में की जाती है.

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Published by: Sandip tiwari

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