संवाददाता, कोलकाता
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दावा किया कि राज्य में एसआइआर की प्रक्रिया को लेकर फैली चिंता और तनाव के कारण प्रतिदिन तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इन मौतों की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को लेनी चाहिए. अब तक 110 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है.
उन्होंने दावा किया कि एसआइआर की वजह से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण रोजाना तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं, जबकि 40 से 45 लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि इतने वर्षों बाद क्या लोगों को यह साबित करना पड़ेगा कि वे इस देश के नागरिक हैं. ममता बनर्जी ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ बीआर अंबेडकर जैसी महान हस्तियों का अपमान किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि देश के इतिहास को विकृत करने के प्रयास किये जा रहे हैं.
तृणमूल सुप्रीमो ने केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा परिकल्पित योजना आयोग को समाप्त कर उसकी जगह नीति आयोग की स्थापना करने का आरोप लगाया. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अब तक नेताजी की जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित नहीं किया गया है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि देश के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के सपनों को तार-तार किया जा रहा है और भगवा ब्रिगेड द्वारा गढ़ा गया इतिहास लोगों पर थोपा जा रहा है, जिसका वास्तविक इतिहास से कोई संबंध नहीं है.
उन्होंने कहा कि लोगों के अधिकार छीने जा रहे हैं और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है. व्यंग्यात्मक लहजे में ममता बनर्जी ने कहा कि अगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज जीवित होते, तो क्या उन्हें भी ‘तार्किक विसंगति’ के नाम पर एसआइआर सुनवाई के लिए नोटिस भेजा जाता और उनकी भारतीय नागरिकता पर सवाल उठाये जाते?
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि तार्किक विसंगतियों के आधार पर निर्वाचन आयोग ने 1.38 करोड़ लोगों को एसआइआर सुनवाई के लिए तलब किया है और मसौदा मतदाता सूची से पहले ही 58 लाख नाम हटाये जा चुके हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि कुल प्रभावित लोगों की संख्या दो करोड़ तक पहुंचती है. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा के शीर्ष नेता चुनाव से पहले बंगाल में भाषण देते समय बांग्ला भाषा के कुछ शब्द बोलने के लिए ‘टेलीप्रॉम्प्टर’ का इस्तेमाल करते हैं, जो बंगाल के बुद्धिजीवियों का अपमान है. उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषी लोग अपने उपनाम अलग-अलग तरीकों से लिखते हैं.
उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उनके उपनाम की वर्तनी ‘बनर्जी’ और ‘बंद्योपाध्याय’ दोनों तरह से लिखी जाती है, लेकिन एसआइआर प्रक्रिया से जुड़े लोगों को यह बुनियादी तथ्य भी नहीं पता. उन्होंने कहा कि इसी तरह की विसंगतियों के कारण 1.38 करोड़ लोगों को नोटिस जारी किये गये हैं.मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘मानवता’ को ‘अमानवता’ के खिलाफ लड़ना पड़ रहा है. उन्होंने महाभारत के कौरव-पांडव संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अच्छाई और बुराई की लड़ाई है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रसिद्ध नारे ‘दिल्ली चलो’ का उल्लेख करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि मानवता को फिर से स्थापित करने के लिए इस नारे को एक बार फिर बुलंद करना होगा.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
