Purulia Crime News: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की आद्रा थाना पुलिस ने 70 लाख रुपए से अधिक के मोटरसाइकिल लोन घोटाला (Motorcycle Loan Fraud) के आरोप में जाने-माने व्यवसायी को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान अभिषेक बनर्जी के रूप में हुई है, जो इलाके में अभिषेक ऑटोमोबाइल्स का संचालक है. आरोपी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बैंक और आम ग्राहकों को झांसा देकर इस पूरे वित्तीय फर्जीवाड़े को अंजाम दिया.
फर्जी दस्तावेजों के सहारे पास कराये जा रहे थे लोन
पुलिस ने बताया कि आरोपी अभिषेक बनर्जी और उसके साथी शोरूम में आने वाले ग्राहकों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करते थे. ग्राहकों के नाम पर उनकी जानकारी के बिना या उसमें हेरफेर करके मोटरसाइकिल ऋण (Bike Loan) स्वीकृत करा लिया जाता था. इस प्रक्रिया में ऋण की राशि का गबन कर बैंक को सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया.
HDFC बैंक की शिकायत पर खुली पोल
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब देश के प्रतिष्ठित निजी बैंक एचडीएफसी (HDFC Bank) के अधिकारियों को अपनी आंतरिक जांच में वित्तीय गड़बड़ी की भनक लगी. बैंक प्रबंधन की ओर से इस संबंध में पुरुलिया के आद्रा थाने में लिखित शिकायत दर्ज करायी गयी. इसमें कहा गया कि अभिषेक ऑटोमोबाइल्स के संचालक ने 70,04,498 रुपए की वित्तीय अनियमितता और जालसाजी की है. बैंक की इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को दबोच लिया.
ये भी पढ़ें: बंगाल : पुरुलिया जिला परिषद के उपाध्यक्ष समेत तीन गिरफ्तार, सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ का आरोप
अदालत ने जमानत याचिका की खारिज
गिरफ्तारी के बाद सोमवार को आरोपी व्यवसायी अभिषेक बनर्जी को कड़ी सुरक्षा के बीच रघुनाथपुर महकमा अदालत में पेश किया गया. अदालत में आरोपी के वकीलों ने जमानत की अर्जी दाखिल की थी, लेकिन सरकारी वकील की दलीलों और मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने आरोपी को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया.
ये भी पढ़ें: पुरुलिया में और तीन छात्राओं को नहीं मिले टैब के रुपये, चले गये तमलुक
कड़ाई से पूछताछ कर रही आद्रा थाने की पुलिस
आद्रा थाना पुलिस अब रिमांड के दौरान आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है. पुलिस का मानना है कि इस पूरे लोन घोटाले के पीछे एक सुनियोजित रैकेट काम कर रहा था. अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में बैंक के किसी कर्मी या अन्य स्थानीय दलालों की संलिप्तता है या नहीं.
