बंगाल चुनाव में आलू बिगाड़ेगा ममता बनर्जी का खेल! 40 लाख वोटर की नाराजगी पड़ सकती है भारी

Potato Crisis in Bengal: पश्चिम बंगाल में आलू की बंपर पैदावार किसानों के लिए मुसीबत बन गयी है. लागत न निकलने से नाराज आलू उत्पादक चुनाव में टीएमसी का खेल बिगाड़ सकते हैं. हुगली और बर्धमान जैसे जिलों में भारी रोष.

Potato Crisis in Bengal: पश्चिम बंगाल के चुनावी दंगल में इस बार आलू एक बड़ा सियासी मुद्दा बनकर उभरा है. राज्य के कई जिलों में आलू किसानों के बीच गहराता संकट सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. आलू कीमतों में भारी गिरावट विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकती है. इस संकट की सीधी मार करीब 10 लाख आलू उत्पादकों और उनसे जुड़े 40 लाख मतदाताओं पर पड़ रही है.

बंपर पैदावार बनी जी का जंजाल

उत्तर प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल देश का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है. बंगाल के हुगली, पूर्व व पश्चिम बर्धमान, मेदिनीपुर, हावड़ा, बांकुड़ा, पुरुलिया और नदिया जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है. इनमें से अधिकांश जिले दक्षिण बंगाल में हैं, जो ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माने जाते हैं.

  • रिकॉर्ड उत्पादन : वर्ष 2025-26 में राज्य में 140-150 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है.
  • दामों में भारी गिरावट : बंपर पैदावार के कारण बाजार में आलू की भरमार हो गयी है. किसानों को अपनी फसल 4 से 5 रुपए प्रति किलो के बेहद कम दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है.
  • आलू बाहर भेजने पर रोक : आलू किसानों की परेशानी ये है कि वे अपनी फसल अन्य राज्यों में नहीं बेच सकते. इसलिए उनका गुस्सा चरम पर है.

लागत भी नहीं निकल रही, कर्ज में डूबे किसान

आलू की खेती करने वाले किसानों की हालत दयनीय हो गयी है. कुछ किसानों ने एक बीघा जमीन पर खेती के लिए करीब 30,000 रुपए खर्च किये. उन्हें बदले में महज 200 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है. बुवाई के समय साहूकारों से मोटा कर्ज लेने वाले किसान अब भारी कर्ज के बोझ तले दब गये हैं. कई किसानों ने अपनी फसल को खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़ दिया है.

एक्सपोर्ट पॉलिसी पर उठे सवाल, सरकार से नाराजगी

किसानों का आरोप है कि इस संकट के पीछे राज्य सरकार की गलत नीतियां हैं. कुछ साल पहले घरेलू बाजार में किल्लत होने पर ममता बनर्जी की सरकार ने ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों को होने वाले निर्यात पर रोक लगा दी थी. बंगाल से सप्लाई बाधित होने पर पड़ोसी राज्यों ने अपनी व्यवस्था खुद कर ली. अब जब बंगाल में सरप्लस आलू है, तो बाहर के बाजार खत्म हो चुके हैं.

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Potato Crisis in Bengal: ममता बनर्जी ने की हैं कई घोषणाएं

ममता बनर्जी ने आलू किसानों के इस संकट से निपटने के लिए कई घोषणाएं की हैं, लेकिन किसान अब भी संशय में हैं. उन्हें डर है कि सरकारी मदद उनके कर्ज के पहाड़ को कम करने और लागत वसूलने में नाकाफी साबित होगी.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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