आइ-पैक मामले 22 मई को सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट लेगा ममता बनर्जी के व्यवहार पर फैसला

Mamata Banerjee: सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिकारी ने अदालत को बताया कि दूसरी तरफ की शुरुआती दलीलें पूरी हो चुकी हैं और अब ईडी अपनी दलीलें रखने के लिए तैयार है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 मई तय की.

Mamata Banerjee: कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ईडी की याचिका पर सुनवाई 22 मई तक टाल दी है. इसमें प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कोलकाता स्थित आइ-पैक के दफ्तर में चल रही तलाशी कार्रवाई में हस्तक्षेप किया था. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई आगे बढ़ा दी. ईडी की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अगले हफ्ते जल्द सुनवाई की मांग की थी. हालांकि, इससे पहले अदालत ने कहा था कि मामला जुलाई में भी सूचीबद्ध हो सकता है.

क्या है मामला

यह मामला आठ जनवरी को ईडी द्वारा की गयी तलाशी कार्रवाई से जुड़ा है. यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी और करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गयी थी. ईडी का आरोप है कि तलाशी के दौरान ममता बनर्जी पुलिस और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आइ-पैक कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं और जांच में दखल दिया था. ईडी ने ममता बनर्जी, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के निर्देश मांगे हैं. साथ ही मामले की जांच सीबीआइ को सौंपने की भी मांग की है.

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ की थी तल्ख टिप्पणी

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर कोई मुख्यमंत्री चल रही जांच में दखल देता है, तो इससे लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है. अदालत ने कहा था कि यह सिर्फ राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है. यह एक ऐसे व्यक्ति का मामला है, जो मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए पूरे सिस्टम और लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा है.

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ईडी व ममता बनर्जी ने एक-दूसरे पर लगाये हैं गंभीर आरोप

ईडी का आरोप है कि तलाशी के दौरान उसके अधिकारियों को रोका गया और डराया-धमकाया गया. अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने जांच में रुकावट डालने के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि वह वहां सिर्फ तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा गोपनीय और निजी डेटा वापस लेने गयी थीं. हलफनामे में कहा गया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणनीति से जुड़ा संवेदनशील राजनीतिक डेटा तलाशी के दौरान देखा जा रहा है, जिसके बाद वह वहां पहुंचीं. हलफनामे में यह भी दावा किया गया कि ईडी अधिकारियों ने कुछ डिवाइस और दस्तावेज वापस लेने की अनुमति दी थी और उसके बाद तलाशी शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से जारी रही.

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लेखक के बारे में

Published by: Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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