कोलकाता.
सुप्रीम कोर्ट में आइ-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के निदेशक के आवास और कार्यालय में इडी द्वारा की गयी छापेमारी से जुड़े मामले की सुनवाई एक बार फिर टल गयी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी. मंगलवार को जैसे ही मामला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की अस्वस्थता की जानकारी अदालत को दी गयी. इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सहमति से अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी.प्रवर्तन निदेशालय (इडी) का आरोप है कि कोयला चोरी घोटाले की जांच के सिलसिले में आइ-पैक कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने इडी की कार्रवाई में बाधा डाली. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं तलाशी स्थलों पर पहुंचीं और आइ-पैक परिसर से महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अपने साथ ले गयीं.इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी कड़ा रुख अपना चुका है. 15 जनवरी की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि इडी की जांच में मुख्यमंत्री द्वारा कथित दखलअंदाजी का मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है.
कोर्ट ने इस संबंध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, पूर्व डीजीपी राजीव कुमार सहित अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया था. उस दिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह इस प्रश्न की समीक्षा करेगी कि क्या किसी गंभीर अपराध की जांच में राज्य की कानून-प्रवर्तन एजेंसियां केंद्रीय एजेंसी के कार्य में हस्तक्षेप कर सकती हैं.इस पूरे विवाद के बाद पश्चिम बंगाल में उन इडी अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गयी थी, जिन्होंने आठ जनवरी को आइ-पैक कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी. मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छापेमारी से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था. इडी ने मांग की है कि आइ-पैक छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा शीर्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर केंद्रीय एजेंसी के काम में कथित बाधा डालने की सीबीआइ जांच करायी जाये.
