कोलकाता से शिवकुमार राउत की रिपोर्ट
महानगर की कई ऐतिहासिक हेरिटेज इमारतें सही देख-रेख के अभाव में जर्जर हो रही हैं और इतिहास की अनमोल निशानियां धीरे-धीरे मिटती जा रही हैं. इन इमारतों के जीर्णोद्धार और उचित रखरखाव के लिए अक्सर मालिकों के पास आर्थिक संसाधनों की भारी कमी होती है. नतीजतन, रियल एस्टेट डेवलपर्स इन हेरिटेज इमारतों को खरीदकर उनकी जगह बहुमंजिला इमारतें और शॉपिंग मॉल बना रहे हैं. इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए कोलकाता नगर निगम जल्द ही एक नया हेरिटेज कानून लागू करने जा रहा है. यह कानून मालिकों के आर्थिक हितों और हेरिटेज इमारतों के ऐतिहासिक स्वरूप दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
क्या है टीडीआर और कैसे मिलेगा मालिकों को लाभ
प्रस्तावित कानून के तहत मालिकों को उनके ‘डेवलपमेंट राइट्स’ (विकास के अधिकार) को बेचने की अनुमति मिलेगी, जिसे ‘ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स’ (टीडीआर) कहा जाता है. पिछले कुछ वर्षों से कोलकाता की हेरिटेज संपत्तियों के रखरखाव को लेकर कई जटिलताएं बनी हुई हैं. वर्तमान में निगम हेरिटेज इमारतों के प्रॉपर्टी टैक्स में कुछ छूट देता है, लेकिन यह छूट सही रखरखाव की शर्त पर मिलती है. रखरखाव के भारी खर्च की तुलना में टैक्स बचत बहुत कम होने के कारण यह व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हो पा रही थी. इसी समस्या से निपटने के लिए लंदन की तर्ज पर टीडीआर कानून का प्रारूप तैयार किया गया है, जिससे ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचाए बिना मालिकों को उचित मुआवजा मिल सके.
इमारत गिराने पर रहेगी पूर्ण रोक
इस नये कानून के तहत हेरिटेज घोषित की गयी इमारत को गिराने या उसके मूल ढांचे में बदलाव कर फिर से बनाने पर पूर्ण कानूनी रोक रहेगी. हालांकि, क्षतिपूर्ति के रूप में प्रॉपर्टी मालिक को दोगुना फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) दिया जायेगा. उदाहरण के लिए, यदि किसी हेरिटेज संपत्ति का क्षेत्रफल 2,000 स्क्वायर फीट है, तो मालिक को 4,000 स्क्वायर फीट के बराबर एफएआर का अधिकार मिलेगा. मालिक इस अतिरिक्त छूट का उपयोग शहर में अपनी किसी दूसरी जमीन पर निर्माण कार्य करने या इसे किसी डेवलपर को बेचने में कर सकते हैं.
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चुनाव के बाद बोर्ड गठन पर होगी अंतिम घोषणा
निगम ने टीडीआर से जुड़ा ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य के शहरी विकास और नगरपालिका मामले विभाग को सौंप दिया है. विधानसभा में नया कानून पारित होने से पहले विभाग की कानूनी शाखा इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है. निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है. इस वर्ष नवंबर में होने वाले कोलकाता नगर निगम चुनाव के बाद नया बोर्ड गठित होगा, जिसके बाद मेयर-इन-काउंसिल की बैठक में मोहर लगाकर इसे आधिकारिक रूप से लागू कर दिया जायेगा.
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