संवाददाता, कोलकाता.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार यह आरोप लगाती रही हैं कि केंद्र सरकार 100 दिन के रोजगार की योजना का बकाया नहीं दे रही है. 2022 से मनरेगा का पैसा देने के लिए कई बार आवेदन किया गया, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे अब तक मंजूरी नहीं दी है.
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से राज्य के पंचायत मंत्री प्रदीप मजूमदार ने मिलने का समय मांगा है. उनके साथ बातचीत से पहले अपनी तैयारियों को वह मजबूत करना चाह रहे हैं. सभी जिला प्रशासन से 100 दिन के रोजगार योजना के तहत फर्जी जॉब कार्ड से संबंधित तथ्य नबान्न ने उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में राज्य के पंचायत मंत्री सभी तथ्य उपलब्ध करा सकें, इसलिए जिला प्रशासन से सभी तरह की जानकारी मांगी गयी है. हाल ही में मनरेगा से जुड़े नोडल अधिकारियों के साथ पंचायत विभाग ने वर्चुअल बैठक की है. बैठक में फर्जी जॉब कार्ड को लेकर तथ्य तैयार रखने को कहा गया है. जो जॉब कार्ड रद्द हुए हैं, उनके होल्डर्स ने अतीत में रुपये लिये हैं या नहीं, इसकी जांच करने को भी कहा गया है.
इस योजना के तहत जो कार्य हुआ है, उसके ऑडिट का काम जल्द खत्म करने का निर्देश भी दिया गया है. पिछले 25 जनवरी को केंद्र सरकार ने मनरेगा को लेकर राज्य सरकार को एक पत्र भेज कर रद्द जॉब कार्ड को लेकर बात उठायी है. किन-किन कारणों से जॉब कार्ड रद्द किया जायेगा, इस बारे में भी स्पष्ट कर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि तीन वर्षों तक यदि कोई काम नहीं करता है, अपने निवास स्थान से लंबे समय के लिए अन्यत्र जाने व एक ही परिवार में कई जॉब कार्ड व जॉब कार्ड होल्डर की मौत के कारण हो सकते हैं. केंद्र ने स्पष्ट किया है कि ऐसे लोगों का जॉब कार्ड रद्द करने का काम राज्य सरकार को ही करना होगा. यदि किसी जॉब कार्ड होल्डर की मौत हुई है तो उसके परिवार को रुपये मिले हैं कि नहीं, इसकी स्पष्ट तौर पर जानकारी देने को कहा गया है. राज्य के पंचायत मंत्री बैठक से पहले सभी तथ्य अपने पास रखना चाह रहे हैं, ताकि केंद्र सरकार बकाया देने को तैयार हो जाये.
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