Kamduni Rape Case: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य सरकार अब उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में कामदुनी सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड की पीड़िता के परिवार का विरोध नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सरकारी वकील उपलब्ध कराकर पूरी कानूनी सहायता प्रदान करेगी. मुख्यमंत्री ने बारुईपुर में सामूहिक दुष्कर्म-हत्या की शिकार हुई नाबालिग के परिजनों से भी मुलाकात के बाद यह ऐलान किया.
क्या है 2013 का कामदुनी कांड?
वर्ष 2013 में उत्तर 24 परगना जिले के कामदुनी में कॉलेज से घर लौट रही एक छात्रा का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था. बाद में बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गयी. इस घटना ने पूरे पश्चिम बंगाल को झकझोर कर रख दिया था.
बारासत कोर्ट ने 3 को उम्रकैद और 3 को सुनायी थी मौत की सजा
वर्ष 2016 में सत्र अदालत (बारासात कोर्ट) ने मामले के 3 दोषियों को मौत की सजा और 3 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनायी थी. हालांकि, बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2 दोषियों के मृत्युदंड को उम्रकैद में बदल दिया था. मौत की सजा पाये तीसरे दोषी को बरी कर दिया था. हाईकोर्ट ने अन्य 3 दोषियों की सजा भी कम कर दी थी.
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हाईकोर्ट के फैसले को परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. परिवार ने आरोप लगाया कि तत्कालीन राज्य सरकार और पुलिस ने अदालतों के सामने अहम सबूत पेश नहीं किया. पुलिस पर जांच में ढिलाई बरतने के भी आरोप परिवार ने लगाये थे.
ममता बनर्जी पर शुभेंदु अधिकारी ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा- पश्चिम बंगाल सरकार अब न्याय की लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. हमारी सरकार ऐसी जघन्य घटनाओं को छोटी-मोटी घटना या प्रेम-प्रसंग बताकर खारिज नहीं करेगी, न ही पीड़िता पर सवाल उठायेगी. न न्याय के बदले 10 लाख रुपए का मुआवजा देकर मामला दबाने की कोशिश करेगी.
ममता बनर्जी ने प्रदर्शनकारियों को कहा था ‘माओवादी’
वर्ष 2013 में कामदुनी दौरे के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘माओवादी’ करार दे दिया था. इसके लिए ममता बनर्जी की काफी आलोचना हुई थी.
