राज्य के अंशकालिक शिक्षकों के वेतन दावों को नये सिरे से सुनें

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के अंशकालिक अनुबंधित शिक्षकों द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं के एक समूह का निबटारा करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वह शिक्षकों को सुनवाई का अवसर देने के बाद उनके वेतन बकाया के दावों पर नये सिरे से निर्णय लें.

कोलकाता.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के अंशकालिक अनुबंधित शिक्षकों द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं के एक समूह का निबटारा करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वह शिक्षकों को सुनवाई का अवसर देने के बाद उनके वेतन बकाया के दावों पर नये सिरे से निर्णय लें. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश तब पारित किया, जब नियमित शिक्षकों के बराबर मूल वेतन के भुगतान के संबंध में कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन न करने के आरोप लगाये गये थे. यह अवमानना कार्यवाही द स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल व अन्य बनाम अनिर्बान घोष व अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के 16 जुलाई, 2024 के आदेश के कथित उल्लंघन से उत्पन्न हुई थी. उस आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कलकत्ता हाइकोर्ट के तीन सितंबर, 2020 के फैसले का पालन करने का निर्देश दिया था.

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि राज्य ने उनकी सेवा की पूरी अवधि के लिए देय भुगतान जारी नहीं किया है. उन्होंने कहा कि हालांकि प्रतिवेदन प्रस्तुत किये गये थे, लेकिन उन्हें कभी भी सुनवाई का अवसर प्रदान नहीं किया गया. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि संबंधित स्कूल अधिकारियों से प्रासंगिक रिकॉर्ड नहीं मंगाये गये, जिससे देय राशि की उचित गणना और भुगतान नहीं हो सका.

याचिकाकर्ताओं ने हाइकोर्ट के उस निर्देश पर बहुत जोर दिया, जिसमें कहा गया था कि सचिव रिट याचिकाकर्ताओं और संबंधित स्कूलों को सुनवाई का अवसर देने पर ऐसे प्रतिवेदन पर विचार करेंगे. सुनवाई के दौरान, प्रतिवादी-अवमाननाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रक्रियात्मक खामियों के संबंध में एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति की.

याचिकाकर्ताओं को छह सप्ताह में नया प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रतामामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं को छह सप्ताह के भीतर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव के समक्ष एक नया प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी गयी है, जिसमें हाइकोर्ट द्वारा पारित आदेश के संदर्भ में उनकी पूरी शिकायतों/दावों/हकदारों का विवरण हो. कोर्ट ने निर्देश दिया कि सचिव याचिकाकर्ताओं को प्रतिनिधि क्षमता में व्यक्तिगत रूप से या कानूनी सलाहकार/अधिवक्ता के माध्यम से सुनवाई का अवसर प्रदान करेंगे. कोर्ट ने आदेश दिया कि सुनवाई के साथ आगे बढ़ने से पहले याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड संबंधित स्कूलों से मंगाये जायेंगे और पक्षों को उनका निरीक्षण करने की अनुमति दी जायेगी. सक्षम प्राधिकारी को चार महीने की अवधि के भीतर एक विस्तृत तर्कपूर्ण आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई प्रतिकूल आदेश पारित किया जाता है, तो याचिकाकर्ताओं के पास कानून के अनुसार उपलब्ध कानूनी उपायों का लाभ उठाने का विकल्प खुला रहेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Bijay kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >