रक्षा मंत्रालय व विश्वभारती की जमीन पर है अवैध कब्जा

उन्होंने संसद मेंं बताया है कि विश्वभारती विश्वविद्यालय ने लगभग 62.0225 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण की पहचान की है.

भाजपा सांसदों के प्रश्न के जवाब में संबंधित मंत्रियों ने संसद में दी जानकारीकोलकाता. पश्चिम बंगाल में स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है. ऐसी ही जानकारी भाजपा सांसद सौमित्र खां के प्रश्न के जवाब में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने संसद में दी है. उन्होंने संसद मेंं बताया है कि विश्वभारती विश्वविद्यालय ने लगभग 62.0225 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण की पहचान की है. विश्वविद्यालय ने परिसर की सुरक्षा, बाड़ लगाने, अतिक्रमण हटाने और भूमि अतिक्रमण की रोकथाम के लिए कई उपाय किये हैं. इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक नोटिस जारी किया है और अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन और राज्य सरकार से लगातार सहायता मांगी है. अदालती मामले दायर करके कानूनी कार्रवाई भी की गयी है. 2007-08 में विश्वविद्यालय परिसर का सर्वेक्षण और सीमांकन किया गया था और 550 से अधिक स्तंभ स्थापित किये गये थे. परिसर के चारों ओर 30 किलोमीटर से अधिक लंबी चारदीवारी खड़ी की गयी है. इसके साथ ही शिक्षा मंत्री ने बताया कि विश्वभारती में वर्तमान समय में 53 रिसर्च प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसके लिए केंद्र ने 3.46 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं.

बंगाल में रक्षा विभाग की 1541 एकड़ जमीन पर हुआ है अतिक्रमण

सांसद शमिक भट्टाचार्य के प्रश्न के जवाब में केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि पश्चिम बंगाल राज्य में रक्षा मंत्रालय की अधीनस्थ 43493 एकड़ भूमि में से 1540.85 एकड़ भूमि अतिक्रमण के अधीन है. कुल अतिक्रमित भूमि में से, बैरकपुर में 2.3716 एकड़ भूमि अतिक्रमण के अधीन है, जबकि जलापहाड़ और लेबोंग छावनी में कोई अतिक्रमण नहीं है. मंत्रालय ने बताया कि अतिक्रमण का पता लगाना, उसकी रोकथाम करना और उसे हटाना एक सतत प्रक्रिया है. रक्षा भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के प्रावधानों के साथ-साथ छावनी अधिनियम, 2006 के तहत की जा रही है. बताया गया है कि भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाये गये हैं. बताया गया है कि संबंधित कार्यालयों द्वारा रक्षा भूमि का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और जहां भी अतिक्रमण का पता चलता है, तो पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ घनिष्ठ समन्वय के साथ कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर उन्हें हटा जा रहा है.

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Published by: Ganesh mahto

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