कोलकाता. पूर्व माकपा सांसद चंद्रकला पांडेय का बुधवार को निधन हो गया. वह 83 वर्ष की थीं. आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उन्होंने दोपहर एक बजे के करीब अंतिम सासें लीं. यहां उनका कई दिनों से इलाज चल रहा था. ब्रेन स्ट्रोक से उनका निधन हो गया. चंद्रकला पांडेय कलकत्ता विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष रही हैं. उनके निधन पर कई हस्तियों ने शोक जताया है. प्रोफेसर अमरनाथ ने अपने फेसबुक पेज पर कहा कि 1994 में जब वह कलकत्ता विश्वविद्यालय में रीडर पद पर नियुक्त होकर पहुंचे तो उस समय चंद्राजी विभागाध्यक्ष थीं. वह उनकी सादगी के कायल थे. एक कवियत्री के रूप में भी उनकी पहचान थी. ‘आराम कहां है’ तथा ‘उत्सव नहीं हैं मेरे शब्द’ शीर्षक से उनके दो काव्य संग्रह प्रकाशित हैं. ‘सागर पाखी’ नाम से उनकी कविताओं का एक एलबम भी 2001 में रिलीज हुआ था, जिसमें उनके नौ गीत स्वरबद्ध हैं. उन्होंने ‘साम्या चिंतन’ त्रैमासिक पत्रिका का लंबे समय तक सह संपादन किया.
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