खुद को वैध वोटर साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे बुजुर्ग, बीमार व दिव्यांग

राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दूसरे चरण के तहत ब्लॉक कार्यालयों में तनाव फैला हुआ है, जहां बुजुर्ग, दिव्यांग और संवेदनशील मतदाता शारीरिक परेशानियों, लंबी यात्राओं और आजीविका का नुकसान सहते हुए यह साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं कि वे वैध मतदाता हैं.

एजेंसियां, कोलकाता

राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दूसरे चरण के तहत ब्लॉक कार्यालयों में तनाव फैला हुआ है, जहां बुजुर्ग, दिव्यांग और संवेदनशील मतदाता शारीरिक परेशानियों, लंबी यात्राओं और आजीविका का नुकसान सहते हुए यह साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं कि वे वैध मतदाता हैं. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुनवाई केंद्रों पर इस प्रक्रिया से जुड़े गहन भावनात्मक मुद्दों को महसूस किया जा सकता है. ऑक्सीजन मास्क लगाकर रिश्तेदारों द्वारा लाये जा रहे 80 साल के बुजुर्ग, कार्यालय के फर्श पर रेंगकर पहुंचते दिव्यांग व्यक्ति और मतदाता सूची से नाम हटाये जाने से डरे दिहाड़ी मजदूरों सभी ने प्रशासनिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच एक बढ़ते हुए अंतर को उजागर किया है.

चुनाव आयोग ने पहले चरण के एसआइआर के बाद 16 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें 58 लाख से अधिक नाम हटाये जाने के बाद मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ हो गयी. दूसरे चरण की शुरुआत 27 दिसंबर को शुरू हुई, जिसमें 1.67 करोड़ मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच हो रही है. इनमें से 1.36 करोड़ को तार्किक विसंगतियों के कारण चिह्नित किया गया है और 31 लाख के रिकॉर्ड में समस्या है. पश्चिम मेदिनीपुर के डेबरा ब्लॉक में 87 वर्षीय स्नेहलता भक्त 32 किलोमीटर की यात्रा के बाद एसआइआर कार्यालय पहुंचीं. उनकी नाजुक हालत देख ब्लॉक विकास अधिकारी बाहर आये और दस्तावेजों की जांच कर उन्हें घर लौटने की अनुमति दी. गंभीर रूप से बीमार और चलने में असमर्थ 65 वर्षीय झरना दास को उनके भाई कंधे पर उठाकर सुनवाई केंद्र लाये थे.

उन्होंने कहा कि अगर हम नहीं आते, तो उनका नाम हटा दिया जाता. इस डर के कारण हमें लगता है कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है. जन्म से दृष्टिहीन दीपंकर दास का नाम 2002 की मतदाता सूची में है.

उन्होंने कहा कि मैं देख नहीं सकता हूं. फिर भी मुझे आना पड़ा. हुगली के तारकेश्वर नामक 72 वर्षीय व्यक्ति सुनवाई पर जाने के दौरान गिर पड़े और सिर में चोट लगी. एक ओर आयोग के दिशा-निर्देशों में घर पर सुनवाई और छूट दी गयी है. फिर भी संवेदनशील मतदाताओं को बुलाये जाने के मामले बार-बार सामने आने से कार्यान्वयन में खामियां उजागर हुई हैं. इस दौरान परिवारों को मौखिक आश्वासन मिलता है लेकिन लिखित नोटिस में भौतिक रूप से पेश होने के लिए कहा जाता है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इन मुद्दों को उठाते हुए आरोप लगाया कि एसआइआर के कारण वास्तविक मतदाता 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले वोट देने से वंचित हो सकते हैं. हालांकि, भाजपा का कहना है कि यह पुनरीक्षण मतदाता सूची में पारदर्शिता करने के लिए आवश्यक है. इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.

नैहाटी : एसआइआर कैंप पहुंचे तृणमूल विधायक विवादों में घिरे

बैरकपुर. उत्तर 24 परगना में भाटपाड़ा नगरपालिका के वाइस चेयरमैन देवज्योति घोष के बाद अब सोमवार को नैहाटी के विधायक सनत दे नैहाटी स्टेडियम में आयोजित एसआइआर कैंप में नैहाटी विधानसभा के बूथ नंबर 124 पर एसआइआर की हीयरिंग कैंप में जाकर विवादों में घिर गये. हालांकि विधायक सनत दे का दावा है कि वह लोगों से बात करने गये थे. उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता. उनका दावा है कि वह ऑफिस के अंदर नहीं गये. बल्कि उन्होंने लाइन में खड़े लोगों से बात की. हालांकि, नैहाटी विधायक सनत दे के एसआइआर कैंप में जाने को लेकर भाजपा ने सवाल खड़ा किया है. भाजपा नेता प्रियांगु पांडे का कहना है कि इसे लेकर चुनाव आयोग में शिकायत करेंगे. इसलिए एसआइआर कैंप में जाकर बीएलओ को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं,

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Published by: Akhilesh kumar singh

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