आरामबाग में तेजी से बढ़ रहे तलाक के मामले, विवाहेतर संबंध बना वजह

जिले के आरामबाग में तलाक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि आरामबाग महकमा अदालत में तलाक के मामले तेजी से बढ़े हैं.

प्रतिनिधि, हुगली.

जिले के आरामबाग में तलाक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि आरामबाग महकमा अदालत में तलाक के मामले तेजी से बढ़े हैं. दंपती अदालत जाकर एक-दूसरे के खिलाफ केस दायर कर रहे हैं. इनमें से अधिकांश मामले विवाहेतर संबंधों से जुड़े हैं.

दूसरी ओर, हाल ही में बालिग हुए युवक-युवतियां गुपचुप तरीके से स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर रहे हैं. लेकिन ये शादियां भी जल्द ही टूट रही हैं. भारत में विवाहेतर संबंध कोई अपराध नहीं है. 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि विवाहेतर संबंध तलाक का आधार बन सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसी ””तीसरे व्यक्ति”” को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है. हालांकि, इसका वैवाहिक जीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर कानूनी विशेषज्ञों में बहस जारी है. सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2020 तक आरामबाग महकमा अदालत में हर साल लगभग 200 तलाक के मामले दर्ज होते थे. अब यह संख्या बढ़कर 300 से अधिक हो गयी है. हर महीने औसतन अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं.

इस बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण युवा जोड़ों द्वारा स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत जल्दबाजी में की गयीं शादियां और फिर उनका जल्दी टूटना बताया जा रहा है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ युवा केवल साथ घूमने-फिरने या एकसाथ रहने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट का उपयोग कर रहे हैं. आरामबाग महकमा अदालत के एक सरकारी वकील के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों में दो प्रमुख बातें सामने आयी हैं- पहला, तलाक के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिनमें पहले घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न के आरोप होते थे. लेकिन अब विवाहेतर संबंध के आरोप भी जुड़ रहे हैं. दूसरा, 18 से 25 वर्ष के युवाओं द्वारा की गयीं शादियां तेजी से टूट रही हैं. 100 में से 20 प्रतिशत तलाक के मामले ऐसे ही होते हैं.

एक अन्य वकील ने बताया कि कई मामलों में शादी के बाद परिवार के दबाव में तलाक दायर कराया जा रहा है. कभी लड़के के परिवार वाले, तो कभी लड़की के माता-पिता जबरन तलाक के लिए आवेदन कर रहे हैं.

आरामबाग थाने में भी घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं : वर्ष 2024 में 47 मामले दर्ज हुए, जो सभी तलाक की ओर बढ़ रहे हैं. 2025 में (जनवरी-फरवरी तक) छह मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें सभी का अंजाम तलाक ही दिख रहा है. सवाल यह है कि आरामबाग जैसे छोटे इलाके में अचानक रिश्तों में इतनी कड़वाहट क्यों बढ़ रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती सामाजिक परिस्थितियां, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चाहत, जल्दबाजी में लिये गये निर्णय और परिवारों के दबाव के कारण रिश्ते गड़बड़ा रहे हैं.

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