बंगाल के बिना देश को आजादी नहीं मिलती : ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि यदि बंगाल न होता, तो भारत को आजादी नहीं मिलती, क्योंकि रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस जैसी हस्तियां यहीं पैदा हुईं, जिन्होंने देश की नियति को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

कन्याश्री दिवस कार्यक्रम में बोलीं सीएम- विविधता में एकता का प्रतीक है बंगाल

संवाददाता, कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि यदि बंगाल न होता, तो भारत को आजादी नहीं मिलती, क्योंकि रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस जैसी हस्तियां यहीं पैदा हुईं, जिन्होंने देश की नियति को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. ””कन्याश्री”” योजना की 12वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक समारोह में ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल आशा की किरण है, जो विविधता में एकता का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि अगर बंगाल नहीं होता, तो भारत को आजादी नहीं मिलती. बंगाल की माटी ने रवींद्रनाथ टैगोर, नजरुल इस्लाम और सुभाष चंद्र बोस जैसे प्रख्यात लोगों को जन्म दिया. राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और ””””””””जय हिंद”””””””” का नारा बंगालियों की रचनाएं हैं.

सुश्री बनर्जी का यह बयान काफी मायने रखता है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस बंगाली अस्मिता के इर्द-गिर्द केंद्रित एक अभियान चला रही है और भाजपा शासित राज्यों पर पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों के भाषाई आधार पर उत्पीड़न का आरोप लगा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के ज्यादातर स्वतंत्रता सेनानी बंगाल से थे. उन्होंने कहा : आप पायेंगे कि सेलुलर जेल (पोर्ट ब्लेयर में) के लगभग 70 प्रतिशत कैदी बंगाली थे. पंजाब के स्वतंत्रता सेनानी दूसरे स्थान पर थे. कार्यक्रम में उपस्थित स्कूली छात्राओं से ममता बनर्जी ने कहा कि शुक्रवार को स्वतंत्रता दिवस है और इस मौके पर वह सभी से संकीर्णता और विभाजनकारी विचारों को त्यागने का आग्रह कर रही हैं. उन्होंने कहा : बंगाल विविधता के बीच सद्भाव और एकता का प्रतीक है. हम मजबूत और एकजुट हैं. उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद जो लोग देश में आये, वे सभी (भारत के) नागरिक हैं. उन्होंने कहा : कल ही, मैंने पढ़ा कि एक पिता अपने बेटे के साथ एक खेल प्रतिस्पर्धा में गये थे, लेकिन बांग्ला में बोलने के कारण उन्हें नोएडा के एक होटल में ठहरने की अनुमति नहीं दी गयी. उन्होंने सवाल किया : अगर हम आपकी भाषाओं का सम्मान कर सकते हैं, तो आप हमारी भाषाओं का सम्मान क्यों नहीं कर सकते?

यूजीसी पर शोध गतिविधियों के लिए फंड बंद करने का लगाया आरोप

ममता बनर्जी ने बंगाल को निधि से वंचित किये जाने को भी रेखांकित किया और ‘उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति पर अंकुश लगाने’ के लिए केंद्र की आलोचना की. उन्होंने दावा किया : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शोध गतिविधियों के लिए धन देना लगभग बंद कर दिया है. राज्य सरकार अब उन शैक्षणिक गतिविधियों को प्रायोजित कर रही है. ममता बनर्जी ने कहा कि अंग्रेजी सहित कई भाषाएं सीखने की जरूरत है, लेकिन मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए. उन्होंने कहा कि बांग्ला की मिठास सर्वव्यापी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Akhilesh kumar singh

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >