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Calcutta High Court News: कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पॉक्सो केस में बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने गवाहों से दोबारा जिरह की इजाजत दी है. कहा है कि पॉक्सो मामलों में हर केस को उसके अपने हालात के हिसाब से देखा जाना चाहिए. आमतौर पर ऐसे मामलों में पीड़ित या गवाहों को बार-बार कोर्ट में नहीं बुलाया जाता. कोर्ट ने इस नियम में अपवाद यानी खास स्थिति में छूट दी है.
7 गवाहों से दोबारा जिरह की मंजूरी
जस्टिस अपूर्बा सिन्हा राय ने लोअर कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 7 गवाहों से दोबारा जिरह की मांग ठुकरा दी गयी थी. हालांकि, उन्होंने माना कि पॉक्सो मामलों में गवाहों को मामूली वजह से बार-बार नहीं बुलाया जाना चाहिए.
निचली अदालत ने क्यों ठुकराई थी मांग?
उत्तर और मध्य अंडमान की निचली अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक, पॉक्सो मामलों में पीड़ित या गवाहों को दोबारा बुलाने से बचना चाहिए, जब तक कि बहुत जरूरी न हो. इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गयी थी.
विशेष पॉक्सो अदालत के जज की टिप्पणी बिल्कुल सही थी और इस मामले में कोई दो राय नहीं हो सकती, लेकिन प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसके गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए.
जस्टिस अपूर्बा सिन्हा राय, कलकत्ता हाईकोर्ट
Calcutta High Court का साफ संदेश
पोर्ट ब्लेयर सर्किट पीठ के 5 फरवरी के फैसले में जस्टिस राय ने कहा कि निचली अदालत की बात सही थी, लेकिन हर मामले को उसके गुण-दोष यानी पूरे हालात देखकर तय किया जाना चाहिए.
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पहले दोषी करार, फिर सजा रद्द
इस मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने वर्ष 2022 में एक व्यक्ति को एक लड़की से बलात्कार का दोषी ठहराया था. वर्ष 2024 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरोपी को दोषी करार दिये जाने के फैसले के साथ-साथ उसकी 10 साल की कठोर कैद की सजा को रद्द कर दिया. इस केस में दोबारा बहस का आदेश दिया.
केस से जुड़ी खास बातें
- बलात्कार के मामले में निचली अदालत ने आरोपी की अपील को ठुकरा दिया.
- हाईकोर्ट ने कहा – हर मामले का फैसला गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए.
- वर्ष 2022 में उत्तर और मध्य अंडमान की आरोपी को दोषी ठहराया गया था.
- वर्ष 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट की पीठ ने आरोपी की 10 साल की सजा रद्द कर दी.
- हाईकोर्ट ने फिर रद्द किया लोअर कोर्ट का आदेश, गवाहों से फिर से पूछताछ की अनुमति दी.
विवादों से भरा है केस का इतिहास
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले का पूरा इतिहास विवादों से भरा है. 31 अगस्त 2022 को निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराया था. फिर 9 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने फैसला रद्द कर दया. हाईकोर्ट ने निचली अदालत से कहा कि वह आरोपी से दोबारा पूछताछ करे और नया फैसला लिखे.
आरोपी ने की गवाहों से दोबारा बहस की नयी अपील
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद निचली अदालत ने आरोपी से पूछताछ पूरी की. इसके बाद आरोपी ने कई गवाहों से दोबारा पूछताछ की मांग की, लेकिन निचली अदालत ने इस आवेदन को खारिज कर दिया. अब हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को भी रद्द कर दिया है.
