फालता में भाजपा की बंपर जीत, शुभेंदु अधिकारी बोले- विकास के माध्यम से चुकायेंगे यह ऋण

Suvendu Adhikari: शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछले चुनावों में मतदान ‘प्रहसन’ बन गया था और लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट देने का अधिकार नहीं था. उन्होंने कहा-15 साल बाद लोगों को पहली बार अपना वोट खुद देने की आजादी मिली और उसी के साथ असली जनमत सामने आ गया.

Suvendu Adhikari: कोलकाता. फलता विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कुख्यात डायमंड हार्बर मॉडल अब तृणमूल के हार-बार मॉडल में बदल गया है. रविवार को सोशल मीडिया पर जारी एक राजनीतिक संदेश में मुख्यमंत्री अधिकारी ने भाजपा प्रत्याशी देबांग्शु पांडा को भारी जनादेश देने के लिए फालता की जनता को धन्यवाद दिया.

यह ऋण विकास के माध्यम से चुकायेंगे

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भाजपा ने लोगों से एक लाख वोटों से जिताने की अपील की थी, लेकिन जनता ने उससे भी अधिक समर्थन दिया. उन्होंने दावा किया कि जीत का अंतर एक लाख आठ हजार वोटों को पार कर गया है. मुख्यमंत्री ने कहा- फालता की जनता का यह ऋण विकास के माध्यम से चुकाया जायेगा. हम सोनार फालता बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला

अधिकारी ने बिना नाम लिये तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा- पैराशूट से उतरकर खुद को सेनापति बताने वाला एक ऐसा व्यक्ति, जिसने हर प्रकार के अपराध को संरक्षण दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल ने वर्षों तक सरकारी मशीनरी, सिंडिकेट, धमकी और वसूली के दम पर लोकतंत्र का गला घोंटा. भाजपा नेता के अनुसार, पिछले चुनावों में मतदान ‘प्रहसन’ बन गया था और लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट देने का अधिकार नहीं था. उन्होंने कहा-15 साल बाद लोगों को पहली बार अपना वोट खुद देने की आजादी मिली और उसी के साथ असली जनमत सामने आ गया.

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तृणमूल की लड़ाई अब नोटा से होगी

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यह तृणमूल के राजनीतिक पतन की शुरुआत भर है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी को और बड़े जनआक्रोश का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भविष्य में तृणमूल की लड़ाई भाजपा से नहीं, बल्कि नोटा से होगी. उन्होंने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तृणमूल नोटा से भी पीछे रह गयी थी और पश्चिम बंगाल में भी ऐसी स्थिति बनने वाली है.

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Published by: Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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