शांतिपूर्ण आंदोलन के नाम पर भाजपा ने बर्बरता की : तृणमूल

आरजी कर अस्पताल में एक जूनियर महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या की घटना को एक वर्ष पूरे होने पर शनिवार को पीड़िता के माता-पिता के आह्वान पर नबान्न अभियान निकाला गया.

संवाददाता, कोलकाता

आरजी कर अस्पताल में एक जूनियर महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या की घटना को एक वर्ष पूरे होने पर शनिवार को पीड़िता के माता-पिता के आह्वान पर नबान्न अभियान निकाला गया. हालांकि, पुलिस ने राज्य सचिवालय पहुंचने से पहले ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया. इस अभियान को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला. राज्य की मंत्री डॉ शशि पांजा ने आरोप लगाया कि राखी के दिन भाजपा ने कोलकाता की सड़कों पर तोड़फोड़ और उपद्रव मचाया, ताकि लोग शांति से त्योहार न मना सकें. उनका असली मकसद जनता के बीच अराजकता फैलाना है, न कि पीड़िता को न्याय दिलाना. शांतिपूर्ण आंदोलन के नाम पर भाजपा ने बर्बरता दिखायी और बाहरी लोगों को रैली में लाया. उपद्रवी लोग रक्षाबंधन की भावना, बंगाल की संस्कृति और विरासत को नहीं समझते. वे त्योहार के दिन राज्य को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं.”

तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “रक्षाबंधन के दिन उपद्रवियों को एकत्र करना और परेशानी पैदा करना यह दिखाता है कि भाजपा का हिंदुओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है.

भाजपा नेता कौस्तुव बागची ने आरोप लगाया कि पीड़िता की मां पुलिस की लाठी से घायल हुई हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कुणाल घोष ने कहा, “पुलिस क्यों पीड़िता के माता-पिता को मारेगी? मैं उनका सम्मान करता हूं, लेकिन भाजपा ने उन्हें राजनीति के लिए इस्तेमाल किया.

जो निंदनीय है. उन्हें भीड़ में धकेलना भाजपा की ओछी हरकत है.” उन्होंने आरोप लगाया कि “जो पार्टी खुद को सीबीआइ का मालिक मानती है, उसके साथ पीड़िता के माता-पिता नबान्न अभियान में गये. क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है?”

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By AKHILESH KUMAR SINGH

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