कोलकाता से श्रीकांत शर्मा की रिपोर्ट
Bengal News: लेफ्ट के राज में गैर-कानूनी काम शुरू किया और राज्य में तृणमूल सरकार की छत्रछाया में उसने अपने बालू और कोयला तस्करी का साम्राज्य को तेजी से आगे बढ़ा. कम समय में वह करोड़ी की संपत्ति का मालिक बन बैठा. दर्जनों आरोप के बाद भी, किसी भी सरकार ने उसे गिरफ्तार करना तो दूर पूछताछ करने की भी हिम्मत नहीं जुटा पायी. लेकिन राज्य में भाजपा सरकार बनते ही पांडवेश्वर में रेत स्मगलिंग का ‘बादशाह’ युधिष्ठिर घोष,आखिरकार आज सलाखों के पीछे है.
कोयला और बालू का बड़ा कारोबार
युधिष्ठिर घोष इलाके में कोयला और बालू का एक बड़ा कारोबारी है. उसके खिलाफ इडी में कोयला और बालू का अवैध खनन व तस्करी तथा मनी-लॉन्डरिंग का आरोप है, जिसकी जांच चल रही है और वह इडी के राडार पर है. इडी कई बार उससे पूछताछ कर चुकी है. हालांकि गुरुवार को उसे मई 2002 को पांडवेश्वर थाने में दर्ज एससी/एसटी एक्ट की धारा 30(2) और आइपीसी की धारा 379/411/413 के मामले में गिरफ्तार किया गया है. जीआर केस नंबर 475/2002 में अदालत से आरोपी के खिलाफ वारंट जारी हुआ था, जिसके आधार पर गिरफ्तारी हुई. शुक्रवार को उसे पुलिस उसे दुर्गापुर महकमा अदालत में पेश किया.
अवैध खनन का आरोप
चाहे ओपन-पिट कोयलों खदानों से कोयले की स्मगलिंग हो या फिर नदियों से अवैध रूप से रेत चोरी, युधिष्ठिर घोष का नाम राज्य में हो रहे इन अवैध कार्यों का बादशाह माना जाता था. स्थिति यह थी कि राज्य में उसे ‘कोयला और रेत एम्पायर का बादशाह’ के तौर पर जानता है. आरोप है कि युधिष्ठिर इलाके की कई खुले कोयले खदानों से गैर-कानूनी तरीके से कोयला निकालकर उसे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बेचता था. कम समय मे उसने राज्य के पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर और आस-पास के इलाकों में कई घरों, जमीनों, महंगी कारों और बहुत सारे पैसों का मालिक बन गया है.
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कई ठिकानों में हो चुकी है ईडी की छापेमारी
उसकी संपत्ति को लेकर कई जगहों पर अटकलें लगाई जा रही थीं, सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ईडी ने पहले कोयला और रेत स्कैम की जांच करते हुए उसके घर की तलाशी ली थी. इन्वेस्टिगेटर ने फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और कई जरूरी जानकारी की जांच की. सिर्फ गैर-कानूनी बिज़नेस ही नहीं, उसके खिलाफ़ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों पर भद्दे कमेंट और गाली-गलौज के भी आरोप हैं. स्थानीय लोगों के एक हिस्से का दावा है कि युधिष्ठिर घोष उस असरदार ग्रुप के चेहरों में से एक था जो सालों से कोयला और रेत के बिजनेस के आस-पास बना हुआ था.
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