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Bengal News: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में पशु वध और कुर्बानी को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने चर्चा का रुख आर्थिक मुद्दों की ओर मोड़ने की कोशिश की है. उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी की प्राथमिकता इतिहास या पहचान की राजनीति नहीं, बल्कि राज्य में निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास है. शमिक भट्टाचार्य ने कहा-हमें बाबर, हुमायूं, जहांगीर या अकबर की परवाह नहीं है. हमारी चिंता इस बात को लेकर है कि पश्चिम बंगाल में निवेश कैसे बढ़े, युवाओं को रोजगार कैसे मिले और लोगों का पलायन कैसे रोका जाए.
हुमायूं कबीर के बयान के बाद बढ़ी सियासत
शमिक भट्टाचार्य की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब ऑल जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल सरकार के पशु वध नियंत्रण संबंधी नियमों पर खुलकर सवाल उठाए थे. हुमायूं कबीर ने कहा था कि सरकार बीफ खाने को लेकर नियम बना सकती है, लेकिन धार्मिक कुर्बानी की परंपरा को नहीं रोक सकती. उन्होंने दावा किया कि कुर्बानी की परंपरा 1400 वर्षों से चली आ रही है और आगे भी जारी रहेगी. उनके बयान के बाद राज्य में राजनीतिक बहस और तेज हो गई. भाजपा ने इसे पहचान की राजनीति से जोड़ते हुए आर्थिक मुद्दों पर फोकस करने की बात कही.
फुरफुरा शरीफ से भी उठे सवाल
इस विवाद में फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आम लोगों को कुर्बानी से रोका जा रहा है तो फिर बीफ निर्यात की अनुमति क्यों दी जाती है. तोहा सिद्दीकी ने पूरे देश में एक समान कानून लागू करने की मांग भी उठाई. उनका कहना था कि अलग-अलग राज्यों में अलग नियम होने से भ्रम की स्थिति बनती है.
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निवेश और रोजगार पर भाजपा का जोर
भाजपा अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में रोजगार, उद्योग और निवेश को प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है. शमिक भट्टाचार्य के बयान को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसर चाहिए. अगर बंगाल में उद्योग और निवेश आएंगे, तभी पलायन रुकेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. राज्य में मवेशी वध कानून और कुर्बानी को लेकर जारी बहस के बीच भाजपा ने अब विकास और आर्थिक मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश तेज कर दी है.
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