बंगाल में पब्लिक प्लेस पर पशु वध प्रतिबंध, बलि देने से पहले लेनी होगी सरकार से मंजूरी

Bengal News: सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों में उस मामले का उल्लेख है, जिसके संदर्भ में न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया था. दिशा-निर्देशों में यह भी उल्लेख है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के फैसले राज्य सरकार की वेबसाइट खोलकर देखे जा सकते हैं.

Bengal News: कोलकाता: बंगाल के लोग अब अपनी मर्जी से गाय, बैल, भैंस, बछड़े को नहीं मार सकेंगे. बंगाल सरकार ने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के सख्त प्रवर्तन को अनिवार्य कर दिया है. बुधवार को विधायक के रूप में शपथ लेने के बाद, राज्य सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की.

सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य

पश्चिम बंगाल सरकार ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ के तहत जनता के लिए एक संशोधित नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कहा गया है कि किसी भी पशु या भैंस का वध तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसके पास आधिकारिक प्रमाण पत्र न हो, यह प्रमाण पत्र यह प्रमाणित करता है कि वह पशु वध के लिए उपयुक्त है. संशोधित नोटिस में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पशु वध की अनुमति नहीं होगी.

पशु वध के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की घोषणा

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर पश्चिम बंगाल की सरकार ने पशु वध संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए. इन दिशा-निर्देशों में उच्च न्यायालय के फैसले के अनुपालन में पशु वध के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की घोषणा की गई है. सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं के वध को रोकने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही पशु वध पर कई शर्तें भी लगाई गई हैं.

राज्य ने पशु वध पर क्या शर्तें लगाईं?

  1. भैंसों, बैलों और बछड़ों की बलि के लिए विशिष्ट प्रमाण पत्र उपलब्ध होने चाहिए.
  2. पशु का वध करने से पहले नगरपालिका के अध्यक्ष/पंचायत समिति के अध्यक्ष और सरकारी पशु चिकित्सक से संयुक्त प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है.
  3. यदि कोई व्यक्ति प्रमाण पत्र देने से इनकार करता है, तो 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
  4. सार्वजनिक स्थानों या सड़क किनारे पशुओं का वध करना निषिद्ध है. पशुओं का वध केवल सरकार द्वारा अनुमोदित वधशालाओं में ही किया जा सकता है.
  5. नियम के खिलाफ जानवर को मारते हैं, तो आपको 6 महीने तक की कैद या 1000 टका तक का जुर्माना हो सकता है. यह दोनों भी हो सकता है.

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निर्धारित स्थान पर ही होगा पशु वध

सरकार ने अपने आदेश में कहा कि जिस पशु के संबंध में सर्टिफिकेट जारी किया गया है, उसका वध सिर्फ नगर निगम के वधगृह या स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित किसी अन्य वधगृह में ही किया जाएगा. जिन पशुओं के लिए सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता है, उनका वध किसी भी खुली और सार्वजनिक जगह करने पर सख्त मनाही है. इन नियमों का उल्लंघन करने वाले को छह महीने तक की जेल या 1,000 रुपए तक का जुर्माना भुगतना होगा. 1950 अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय होंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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