घातक ब्लड क्लॉट से जूझ रही वृद्धा को मिली नयी जिंदगी

इएम बाइपास स्थित मणिपाल हॉस्पिटल (जो पहले मेडिका सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नाम से जाना जाता था) ने एक बार फिर उन्नत हृदय देखभाल में अपनी विशेषज्ञता साबित की है.

संवाददाता, कोलकाता

इएम बाइपास स्थित मणिपाल हॉस्पिटल (जो पहले मेडिका सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नाम से जाना जाता था) ने एक बार फिर उन्नत हृदय देखभाल में अपनी विशेषज्ञता साबित की है.

अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अरिंदम पांडे ने हाल ही में 77 वर्षीय एक महिला मरीज को जानलेवा पल्मोनरी एंबोलिज्म (फेफड़ों में खून का थक्का जमना) से सफलतापूर्वक उबारा है. उन्होंने इसके लिए एक अत्याधुनिक एंडोवैस्कुलर तकनीक का प्रयोग किया. दक्षिण 24 परगना की निवासी वृद्धा उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थीं. उन्हें तीव्र पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म था, जो एक खतरनाक स्थिति है जिसमें खून के थक्के नसों से फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं. उनके रक्तस्राव के उच्च जोखिम के कारण, पारंपरिक ब्लड थिनर दवाइयां देना संभव नहीं था. इस चुनौती को देखते हुए डॉ पांडे ने एक विशेष यांत्रिक प्रणाली पेनम्ब्रा इंडिगो एस्पिरेशन सिस्टम का उपयोग किया. इस न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया में बेहद पतले कैथेटर को नसों के माध्यम से शरीर में डाला गया और वैक्यूम तकनीक का उपयोग करके खून के थक्कों को फेफड़ों से सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया. इस तकनीक ने खुली सर्जरी की आवश्यकता को समाप्त कर दिया, जिससे रोगी को जल्दी और सुरक्षित रिकवरी मिली. भविष्य में नये थक्के फेफड़ों तक न पहुंचें, इसके लिए एक अस्थायी इनफीरियर वेना कावा (आइवीसी) फिल्टर (एक छोटा जाल जैसा उपकरण) पेट की नस में डाला गया. जब मरीज की स्थिति स्थिर हो गयी, तो इसे सुरक्षित रूप से निकाल दिया गया. इस तकनीक से न केवल मरीज की जान बची, बल्कि उन्हें एक बड़ी सर्जरी से भी राहत मिली.

डॉ अरिंदम पांडे ने कहा कि आधुनिक तकनीक से हम गंभीर मरीजों को सुरक्षित और तेजी से इलाज दे सकते हैं, खासकर जब पुराने तरीके जोखिमपूर्ण हों. डॉ पांडे ने बताया कि अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुकी हैं.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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