Kolkata Janmashtami: कोलकाता के मोमिनपुर में जन्माष्टमी का जश्न शहर की मिली-जुली संस्कृति का एक बड़ा उदाहरण रहा है. यहां मुस्लिम समाज के लोग इस हिंदू त्योहार के आयोजन में अहम भूमिका निभाते आये हैं. लेकिन इस साल इसमें एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. भाजपा के एक नेता ने इस आयोजन की कमान संभाली है और घोषणा की है कि इसकी आयोजन समिति में केवल हिंदू ही शामिल होंगे.
60 साल पुरानी परंपरा होगी खत्म
इस कदम से भू-कैलाश रोड-हुसैन शाह रोड चौराहे पर लगभग 60 साल पुरानी परंपरा खत्म हो जायेगी. पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हारे हुए उम्मीदवार राकेश सिंह ने कहा कि अब से यह त्योहार सिर्फ हिंदू ही आयोजित करेंगे. उनका तर्क था कि जन्माष्टमी हिंदुओं का धार्मिक त्योहार है. इसकी परंपराओं की रक्षा की जानी चाहिए.
हम आपसी सद्भाव में विश्वास करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी को अपने धर्म या रीति-रिवाजों का अपमान करने देंगे. जन्माष्टमी हिंदुओं का त्योहार है और इसे हिंदुओं द्वारा ही मनाया जाना चाहिए. दूसरे धर्मों के लोगों को जरूर पंडालों में जाना चाहिए, लेकिन अपनी धार्मिक गतिविधियों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है. -राकेश सिंह, भाजपा नेता
मुसलमानों का था उत्सव पर पूरा नियंत्रण : सिंह
इस साल के आयोजन समिति के प्रमुख सिंह ने दावा किया कि पिछले सालों में मुसलमानों का ही इस उत्सव पर पूरा नियंत्रण था. उन्होंने कहा- 18 सदस्यों वाली समिति में 16 मुसलमान थे. इस बार मैंने समिति में बदलाव किया है और इसे पूरी तरह से हिंदुओं की समिति बना दिया है. हम नहीं चाहते कि वे (मुसलमान) हमारे उत्सव का हिस्सा बनें.
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मुसलमानों की भागीदारी पर राकेश को आपत्ति
राकेश सिंह ने उन रीति-रिवाजों में मुसलमानों की भागीदारी पर भी आपत्ति जतायी, जिनमें भगवान कृष्ण के साथ गाय की पूजा की जाती है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों में गाय की बलि देने की प्रथा है.
राकेश ने ममता बनर्जी के बयान को बताया ‘बेतुका’
भाजपा नेता ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की अक्सर दोहरायी जाने वाली बात कि ‘धर्म व्यक्ति का निजी मामला है, लेकिन त्योहार सबके होते हैं’, पर भी निशाना साधा. उन्होंने इसे ‘बेतुका’ करार दिया.
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फिरहाद हकीम पर आरोप और उत्सव की परंपरा
- हिंदू स्वरूप को किया कमजोर : राकेश सिंह ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के पूर्व मंत्री और कोलकाता के महापौर फिरहाद हकीम पर इस आयोजन से जुड़े थे. उन्होंने मुसलमानों को इसके प्रबंधन में अहम भूमिका देकर त्योहार के हिंदू स्वरूप को कमजोर करने की कोशिश की.
- पोर्ट विधानसभा क्षेत्र में आयोजन : कोलकाता नगर निगम के वार्ड-79 में भू-कैलाश रोड-हुसैन शाह रोड चौराहे पर मनाया जाता जन्माष्टमी का जश्न. यह क्षेत्र पोर्ट विधानसभा क्षेत्र में आता है और भवानीपुर के पास है.
- दशकों तक हिंदू-मुस्लिम मिलकर मनाते थे जश्न : दशकों से हिंदू और मुस्लिम मिलकर खिदिरपुर में जन्माष्टमी का जश्न मनाते रहे हैं.
- मोहम्मद काशिम ने की थी शुरुआत : जन्माष्टमी उत्सव की शुरुआत लगभग 60 साल पहले मुस्लिम समाजसेवी मोहम्मद काशिम ने खिदिरपुर समाज कल्याण समिति के बैनर तले की थी.
- 2011 में फिर से शुरू हुआ आयोजन : उत्सव का महत्व धीरे-धीरे कम हो गया, तो वर्ष 2011 में सरकार बदलने के बाद मुस्लिम युवाओं के एक समूह ने इसे फिर से शुरू करने में मदद की.
रीति-रिवाजों से समझौते का सवाल ही नहीं : मो आलम
तृणमूल कांग्रेस के पदाधिकारी और आयोजन समिति के पूर्व सदस्य मोहम्मद आलम ने कहा कि समुदाय की भागीदारी को कभी भी पूजा के हिंदू स्वरूप के विपरीत नहीं माना गया. हमने सब कुछ मिलकर आयोजित किया. रीति-रिवाजों का पालन किया और प्रसाद बांटा. धार्मिक रीति-रिवाजों से समझौता करने का सवाल ही नहीं उठता. इतने सालों से हम इसे साथ मिलकर मनाते आ रहे थे. इस बार समिति में किसी भी मुस्लिम सदस्य को नहीं रखा गया है.
