संविदा कर्मियों को बीएलओ नियुक्त करने पर कार्रवाई कर सकता है चुनाव आयोग

राज्य में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की नियुक्तियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. जानकारी के अनुसार, राज्य के कुछ जिलों में चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन करते हुए करीब दो हजार बूथों पर लगभग 4500 संविदा कर्मियों को बीएलओ नियुक्त कर दिया गया है.

कोलकाता.

राज्य में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की नियुक्तियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. जानकारी के अनुसार, राज्य के कुछ जिलों में चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन करते हुए करीब दो हजार बूथों पर लगभग 4500 संविदा कर्मियों को बीएलओ नियुक्त कर दिया गया है.

अब इन नियुक्तियों को मंजूरी देने वाले जिलास्तरीय चुनाव अधिकारियों से चुनाव आयोग स्पष्टीकरण मांग सकता है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय को मिली रिपोर्ट के अनुसार, जिन संविदा कर्मियों को बीएलओ नियुक्त किया गया है, वे आयोग द्वारा निर्धारित पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते. चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, बीएलओ की नियुक्ति के लिए पहले स्थायी सरकारी कर्मचारियों (ग्रुप-सी या उससे ऊपर) व सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. केवल तभी संविदा कर्मियों पर विचार किया जा सकता है, जब पर्याप्त संख्या में स्थायी कर्मचारी या शिक्षक उपलब्ध न हों.

सूत्रों के मुताबिक, संविदा कर्मियों की इन नियुक्तियों के लिए न तो पर्याप्त कारण बताये गये और न ही सीईओ कार्यालय से आवश्यक स्वीकृति ली गयी. इस कारण संबंधित जिलों के चुनाव अधिकारियों से अब जवाब-तलब किया जा सकता है.

सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि यदि अधिकारी अपने निर्णय को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है. सीईओ कार्यालय ने इस मामले में उन जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है, जहां ये दो हजार बूथ स्थित हैं. उन्हें इन अनियमित नियुक्तियों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है.

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