पश्चिम बंगाल सोलर मैन्युफैक्चरिंग के केंद्र के रूप में उभरेगा. सौर ऊर्जा (Solar Energy) के प्रसार और सोलर पैनल निर्माण के लिए जुपिटर इंटरनेशनल 3,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगा. इससे 3 गीगावाट (3 GW) क्षमता वाले इनगोट-वेफर विनिर्माण संयंत्र (Ingot-Wafer Plant) की स्थापना पर काम शुरू कर दिया है.
चीन के आयात पर निर्भरता होगी कम
इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय सौर बाजार में चीन से आयात (Chinese Imports) पर निर्भरता कम करना और घरेलू विनिर्माण (Domestic Manufacturing) को सशक्त बनाना है. कंपनी केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ का लाभ उठाने के लिए स्थानीय सोलर मॉड्यूल निर्माताओं के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही है. जुपिटर इंटरनेशनल के अधिकारियों के अनुसार, राज्य की नयी औद्योगिक नीति (Industrial Policy) आने के बाद वे बंगाल में और अधिक विस्तार पर विचार करेंगे.
गुजरात के मुकाबले पिछड़ा बंगाल, अब पकड़ेगा रफ्तार
रूफटॉप सोलर क्षमता के मामले में पश्चिम बंगाल में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन वर्तमान में यह कई राज्यों से पीछे है. मार्च 2026 की स्थिति को देखेंगे, तो पायेंगे कि बंगाल में केवल 67 मेगावाट (MW) स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता थी. इसकी तुलना में गुजरात 6,882 मेगावाट क्षमता के साथ देश में सबसे आगे है. इस अंतर को पाटने की तैयारी बंगाल सरकार ने कर ली है. राज्य का लक्ष्य मार्च 2027 तक 1 लाख घरों में ‘पीएम सूर्य घर’ रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है.
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सोलर पावर के साथ छत पर खेती भी
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है. एनबीआईआरटी (NBIRT) एक अभिनव एग्री-वोल्टाइक रूफटॉप सिस्टम (Agri-voltaic Rooftop System) विकसित कर रहा है. यह प्रणाली छतों पर सोलर पैनल से बिजली उत्पादन के साथ-साथ रूफटॉप फार्मिंग (छत पर कृषि) को भी संभव बनायेगी. यह एकीकृत प्रयास राज्य में सौर ऊर्जा को तेजी से अपनाने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा.
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