बंगाल के 2000 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को वापस लाया गया : सीएम

बांग्ला भाषा के मुद्दे पर लगातार विरोध दर्ज करा रहीं ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि मातृभाषा सभी का गौरव है.

मुख्यमंत्री ने झाड़ग्राम में आदिवासी उत्सव का किया उद्घाटन

संवाददाता, कोलकाता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को झाड़ग्राम में आदिवासी उत्सव का उद्घाटन किया और इस मौके पर उन्होंने अन्य राज्यों में बंगाल के प्रवासी श्रमिकों पर हो रहे हमले व चुनाव आयोग द्वारा राज्य के सरकारी कर्मचारियों को निलंबित करने के आदेश को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. झाड़ग्राम में विश्व आदिवासी दिवस से पहले ही उत्सव का माहौल शुरू हो गया है. नौ अगस्त को मनाये जाने वाले इस दिवस के तहत यहां कार्यक्रमों की शुरुआत तीन दिन पहले ही हो गयी. चार दिवसीय इस आयोजन की शुरुआत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में हुई. कार्यक्रम के तहत गुरुवार को प्रशासनिक जनसभा आयोजित की गयी, जिसमें मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय के लोगों के बीच विभिन्न सरकारी योजनाओं की सामग्रियों का वितरण किया.

बांग्ला भाषा के मुद्दे पर लगातार विरोध दर्ज करा रहीं ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि मातृभाषा सभी का गौरव है. उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को बांग्ला भाषा बोलने के कारण दूसरे राज्यों में अत्याचार का सामना करना पड़ रहा है. सुश्री बनर्जी ने कहा कि 2,000 से ज्यादा लोगों को उनके मूल स्थानों पर वापस लाया गया है. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कुछ को जबरन बांग्लादेश भेजा जा रहा है. मुख्यमंत्री ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग द्वारा दो राज्य सिविल सेवकों सहित चार अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार अपने कर्मचारियों के साथ है. गौरतलब है कि मंगलवार को निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में चार अधिकारियों- दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और दो सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) तथा एक डाटा एंट्री ऑपरेटर एवं एक अस्थायी कर्मचारी- को निलंबित करने का आदेश दिया. इन अधिकारियों पर दक्षिण 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर जिलों के क्रमश: बारुईपुर पूर्व और मोयना विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची तैयार करते समय अनियमितताएं बरतने का आरोप है.

आयोग ने साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का भी निर्देश दिया. आयोग के निर्देश पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘हम सभी जानते हैं कि निर्वाचन आयोग केवल चुनाव की घोषणा की तारीख से ही कार्रवाई कर सकता है.’’ पश्चिम बंगाल में 2026 के मध्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस बात पर तीखी राजनीतिक बहस चल रही है कि क्या पड़ोसी राज्य बिहार की तर्ज पर राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) किया जायेगा. ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार राज्य सरकार के सभी अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के साथ है.

सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि किस नियम के तहत निलंबन का आदेश दिया गया, और दावा किया कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. उन्होंने पूछा, ‘‘हम सभी जानते हैं कि निर्वाचन आयोग चुनावों की घोषणा की तारीख से ही कोई कार्रवाई कर सकता है. अभी चुनावों में बहुत समय बाकी है, क्या उन्हें लगता है कि वे एनआरसी के नाम पर किसी को भी धमका सकते हैं?’मुख्यमंत्री आरोप लगा रही हैं कि आयोग एसआइआर की आड़ में ‘पिछले दरवाजे से’ एनआरसी लागू करने की कोशिश कर रहा है. मतदाता सूची से असली मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश हो रही है.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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